अब बारिश के मौसम में सड़क मरम्मत न करने का बहाना नहीं चलेगा. ऐसी तकनीक आ गयी है, जो पानी भरे गड्ढों कीचड और यहां तक की दलदली जमीन पर मरम्मत का काम किा जा सकेगा. इस संबंध में राजधानी दिल्ली में प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड और विशाखापत्तनम की रामुका ग्लोबल इको वर्क प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौत हुआ है.
इस मौके पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने पहाड़ी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्टील स्लैग आधारित सड़क निर्माण तकनीक को तेजी से अपनाने पर कड़ा जोर दिया है. उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों में मौसम की मार से सड़कें बार-बार खराब हो जाती हैं. स्टील स्लैग वाली सड़कें इस समस्या का स्थायी समाधान हैं.
इस तकनीक की शुरुआत दो वर्ष पूर्व परीक्षण प्रोजेक्ट से हुई. गुजरात के सूरत, अरुणाचल प्रदेश के चुनौतीपूर्ण इलाकों और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया. मौजूदा समय कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, असम, गुजरात झारखंड और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य विभिन्न स्तरों पर इसका उपयोग कर रहे हैं.
तकनीक की खासियत
ईकोफिक्स गड्ढा भराई के लिए तैयार मिश्रण है. गीले, कीचड़ भरे या पानी वाले इलाकों में भी तुरंत लगाया जा सकता है. पारंपरिक विधियों से 50% कम समय लगता है. यातायात रुकावट न्यूनतम रहता है. टिकाऊपन दोगुना और लागत 30-40% कम है. पर्यावरण अनुकूल होने से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है. अगले सप्ताह जम्मू-कश्मीर में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित होगी. उसके बाद हिमाचल. उत्तराखंड. पूर्वोत्तर और लद्दाख में विस्तार होगा. TDB 2027 तक 2 लाख टन क्षमता वाला स्टील स्लैग प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करेगा.

पूर्वोत्तर के राज्यों में बॉर्डर रोड आर्गनाइजेशन के साथ मिलकर इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा चुका है.
नरेंद्र मोदी जी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विजन साकार होगा
एक सवाल के जवाब में सीआरआरआई के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. सतीश पांडेय ने बताया कि इस तकनीक से बनने वाली सड़क सस्ती और अधिक समय तक चलने वाली है. पुरानी तकनीक के मुकाबले इस तकनीक में 80 फीसदी समय कम मिलता है. सीएसआईआर-सीआरआरआई द्वारा विकसित ईकोफिक्स तकनीक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विजन को साकार करती है. इस तकनीक का व्यापक उपयोग कर्नाटक एवं असम राज्य में किया गया है. एनएचएआई कई जगह इस तकनीक का इस्तेमाल करके सड़क बना रही है. पहाड़ी सड़कों के लिए यह गेम चेंजर साबित होगी
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