EPFO New Rules 2025: कई बार पीएफ के पैसे निकालने में कर्मचारियों को बहुत परेशानी होती है. नियमों को समझने में घंटों लग जाते हैं और कई बार क्लेम रिजेक्ट हो जाता है क्योंकि लोगों को सही जानकारी नहीं होती. इसी समस्या को दूर करने के लिए ईपीएफओ ने हाल ही में पीएफ निकासी के नियमों को काफी आसान बना दिया है. पहले पीएफ निकासी के लिए 13 अलग-अलग कैटेगरी और नियम थे जो बहुत कठिन थे. अब इन्हें घटाकर सिर्फ 5 मुख्य सेक्शन कर दिए हैं. इन नए नियमों में क्या-क्या बदलाव हुआ है, ये आपको जानना बहुत जरूरी है.
कई बार पीएफ के पैसे निकालने में कर्मचारियों को बहुत परेशानी होती है. पीएफ फंड विड्रॉल के नियमों को ही समझने में घंटो लग जाते हैं, कुछ कर्मचारियों का तो क्लेम इसी वजह से रिजेक्ट हो जाता है क्योंकि उन्हें इन नियमों के बारे में जानकारी ही नहीं होती है. इसी को आसान बनाने के लिए ईपीएफओ ने हाल ही में पीएफ निकासी के नियम आसान कर दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर सदस्य आसानी से अपना पैसा निकाल सकें.

अक्टूबर 2025 में ईपीएफओ(EPFO) ने आंशिक पीएफ फंड निकासी के लिए सिंपल फ्रेमवर्क तैयार किया. पहले पीएफ निकासी के लिए 13 अलग-अलग नियम थे और हर वजह के लिए नौकरी की अलग अवधि जरूरी होती थी, जो 2 से 7 साल तक हो सकती थी. इससे अक्सर भ्रम होता था और कई बार क्लेम रिजेक्ट हो जाते थे. इसके अलावा, ज्यादातर मामलों में कर्मचारी सिर्फ अपने योगदान और ब्याज का ही पैसा निकाल सकता था, वो भी 50% से 100% की लीमिट में, जिससे आपात स्थिति में पैसा निकालना मुश्किल हो जाता था.

वहीं, नए EPFO के नियमों के अनुसार, पीएफ की सभी आंशिक निकासी(Partial Withdrawal) को एक ही सिस्टम में शामिल कर दिया गया है. सबसे बड़ी राहत यह है कि अब लगभग सभी तरह की निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि सिर्फ 12 महीने तय कर दी गई है.
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सबसे अहम बदलाव यह है कि अब निकासी की राशि में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान, साथ ही ब्याज भी शामिल होगा. यानी अब सदस्य अपने एलिजिबल पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकता है, जो पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है. अब आप पहले से ज्यादा और जल्दी पीएफ निकाल सकते हैं. 12 महीने की नौकरी पूरी करने के बाद, ईपीएफओ मेंबर पांच स्थितियों में अपने पीएफ बैलेंस का 100% तक निकाल सकता है.

पहला- खुद या परिवार के इलाज के लिए (एक वित्त वर्ष में तीन बार). दूसरा है -अपनी या बच्चों की शिक्षा के लिए पूरे पीएफ मेंबरशिप में 10 बार कर निकासी कर सकते हैं. तीसरा है- अपनी या बच्चों की शादी में 5 बार निकासी कर सकते हैं. चौथा – रिहायशी जरूरतें जैसे घर खरीद, निर्माण, होम लोन को चुकाने के लिए या मरम्मत के लिए 5 बार निकासी और पांचवां है – विशेष परिस्थितियों में बिना कोई खास कारण बताने की जरूरत नहीं होती. इसमें एक वित्त वर्ष में दो बार पीएफ निकासी कर सकते हैं.

नई निकासी नियमों के बावजूद, EPFO ने सदस्यों की रिटायरमेंट बचत सुरक्षित रखने के लिए पीएफ का 25% बैलेंस नहीं निकालने का नियम है. डेटा दिखाता है कि बार-बार निकासी करने वाले कर्मचारियों की लंबी अवधि की सुरक्षा प्रभावित हो रही थी. कई कम आय वाले कर्मचारियों ने 8.25% के लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग का फायदा नहीं उठाया क्योंकि उन्होंने अक्सर पैसा निकाला.इसलिए अब 25% बैलेंस रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित रखा जाता है.

अगर आप नौकरी से हाथ धो बैठते हैं, तो पीएफ नियम आपको सहूलियत देते हैं.आप कुल पीएफ बैलेंस का 75% (कर्मचारी और नियोक्ता योगदान + ब्याज सहित) तुरंत निकाल सकते हैं, जबकि बाकी 25% एक साल बाद निकाला जा सकता है. कुछ मामलों में पूरी राशि निकालना भी संभव है, जैसे 55 साल की उम्र में रिटायरमेंट, स्थायी विकलांगता, छंटनी, वॉलंटरी रिटायरमेंट, या भारत छोड़कर स्थायी रूप से चले जाना.

ये बदलाव Employees’ Pension Scheme (EPS) के पेंशन लाभों को प्रभावित नहीं करते. पीएफ मेंबर अपनी पेंशन राशि 10 साल की सेवा पूरी होने से पहले निकाल सकता है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 साल की EPS मेंबरशिप जरूरी है.
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