दिसंबर तिमाही में डॉली खन्ना ने दो शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है. ये शेयर हैं प्रकाश इंडस्ट्रीज और जीएचसीएल लिमिटेड. डॉली खन्ना का यह पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग अब चर्चा में है. उनके पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू ₹261 करोड़ के करीब है और उनके निवेश को डॉली के पति राजीव खन्ना मैनेज करते हैं.
प्रकाश इंडस्ट्रीज में घटाई हिस्सेदारी
1980 के दशक से पाइप और स्टील सेक्टर में सक्रिय ‘प्रकाश इंडस्ट्रीज’ डॉली खन्ना के पसंदीदा शेयरों में से एक रहा है. ₹2,436 करोड़ के मार्केट कैप वाली यह कंपनी स्पॉन्ज आयरन से लेकर TMT बार्स तक बनाती है. डॉली खन्ना ने सितंबर 2023 से इस कंपनी पर भरोसा जताया था. जून 2025 में उनकी हिस्सेदारी 2.3% थी, जिसे उन्होंने सितंबर तिमाही में बढ़ाकर 2.9% कर दिया था. लेकिन दिसंबर 2025 की फाइलिंग बताती है कि उन्होंने अब इसे घटाकर 2.6% कर दिया है.
प्रकाश इंडस्ट्रीज की विकास दर पिछले पांच वर्षों में स्थिर रही है. कंपनी की बिक्री FY20 के ₹2,974 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹4,014 करोड़ (6% CAGR) तक पहुंची है. वहीं मुनाफा (EBITDA) भी 8% की वार्षिक दर से बढ़ा है. शेयर की कीमत ने भी निवेशकों को निराश नहीं किया है. जनवरी 2021 में ₹60 पर मिलने वाला शेयर आज ₹136 के करीब है.
डॉली खन्ना ने क्यों निकाला पैसा?
बाजार के जानकारों का मानना है कि डॉली खन्ना द्वारा हिस्सेदारी घटाने के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘ग्रोथ’ में आई रुकावट हो सकती है. सितंबर तिमाही में कंपनी की बिक्री में 33% की भारी गिरावट (YoY) देखी गई. भले ही कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 14% पर बरकरार हो, लेकिन कुल बिक्री का इस तरह गिरना किसी भी ‘वैल्यू निवेशक’ के लिए खतरे की घंटी होता है. जब ग्रोथ की रफ्तार धीमी होती है, तो डॉली खन्ना जैसे निवेशक मुनाफावसूली करना या जोखिम कम करना बेहतर समझते हैं.
GHCL लिमिटेड: सोडा ऐश दिग्गज से थोड़ी दूरी
गुजरात हेवी केमिकल्स लिमिटेड (GHCL) भारत में सोडा ऐश की दूसरी सबसे बड़ी खिलाड़ी है, जिसका मार्केट शेयर 26% से अधिक है. इसके क्लाइंट लिस्ट में P&G और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं. डॉली खन्ना ने मार्च 2025 में इस कंपनी में प्रवेश किया था और दिसंबर के मध्य तक अपनी हिस्सेदारी को 1.24% तक ले गई थीं. हालांकि, ताजा आंकड़ों के अनुसार उन्होंने इसे घटाकर 1.1% कर दिया है.
GHCL का शेयर वर्तमान में 9 के PE (Price-to-Earnings) पर ट्रेड कर रहा है, जबकि इंडस्ट्री का औसत 19 है. यानी वैल्यूएशन के लिहाज से शेयर अभी भी सस्ता या ‘अंडरवैल्यूड’ नजर आता है. पिछले 5 सालों में इस शेयर ने 175% का शानदार रिटर्न दिया है. बावजूद इसके, डॉली खन्ना की ओर से की गई यह मामूली कटौती दर्शाती है कि वे अब इस सेक्टर में और अधिक एक्सपोजर लेने के बजाय सतर्कता बरत रही हैं.
क्या यह केवल ‘प्रॉफिट बुकिंग’ है?
अक्सर छोटे निवेशक दिग्गजों की नकल करते हुए शेयर खरीदते या बेचते हैं, लेकिन डॉली खन्ना के इन बदलावों के पीछे एक गहरी रणनीति छिपी होती है. स्मॉल-कैप सेगमेंट में निवेश करना ‘दोधारी तलवार’ जैसा होता है. डॉली खन्ना की रणनीति के तीन मुख्य स्तंभ माने जाते हैं-
- अनुशासन और धैर्य: वे किसी शेयर को तब तक थामे रखती हैं जब तक उसकी बुनियाद मजबूत हो.
- जोखिम प्रबंधन: जब किसी कंपनी के त्रैमासिक नतीजों में बिक्री या मुनाफे पर दबाव दिखने लगता है तो वे अपनी पोजीशन को हल्का (Stak Trim) करने में संकोच नहीं करतीं.
- सेक्टर रोटेशन: वे अक्सर ट्रेडिशनल मैन्युफैक्चरिंग और केमिकल सेक्टर के बीच संतुलन बनाती हैं. दिसंबर की यह कटौती पोर्टफोलियो को ‘रीबैलेंस’ करने की एक कोशिश हो सकती है ताकि नकदी को सुरक्षित रखा जा सके या किसी नए उभरते अवसर में निवेश किया जा सके.
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