यूरोपीय यूनियन के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) भारत के लिए बड़े आर्थिक मौके खोल सकता है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को 10–11 अरब डॉलर तक के अतिरिक्त निर्यात अवसर मिल सकते हैं. खास बात यह है कि इसके लिए नई उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि मौजूदा निर्यात को नए बाजार की ओर मोड़ा जा सकता है.
अमेरिकी बाजार से ईयू की ओर निर्यात मोड़ने की रणनीति
रूबिक्स डेटा साइंसेज की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में शीर्ष 15 उत्पाद श्रेणियों की हिस्सेदारी करीब 52 प्रतिशत है, जिसकी कुल वैल्यू लगभग 45 अरब डॉलर बैठती है. इनमें से 12 ऐसी श्रेणियां हैं, जिनका लगभग 21 अरब डॉलर का निर्यात ईयू के आयात बास्केट में अभी सीमित है. अगर इन उत्पादों का 50 प्रतिशत निर्यात भी धीरे-धीरे ईयू की ओर मोड़ा जाता है, तो भारत-ईयू व्यापार संबंधों में बड़ा बदलाव आ सकता है.
भारत-ईयू व्यापार की मौजूदा स्थिति
बीते तीन वित्त वर्षों (FY23 से FY25) में भारत और ईयू के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 136.5 अरब डॉलर पर लगभग स्थिर रहा है. हालांकि वित्त वर्ष 2025 में ईयू, अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा द्विपक्षीय व्यापारिक साझेदार बन गया. इसके बावजूद ईयू के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.9 प्रतिशत और निर्यात में 1.9 प्रतिशत ही है, जो व्यापारिक क्षमता और वास्तविक नतीजों के बीच अंतर को दर्शाता है.
कुछ देशों तक सीमित भारतीय निर्यात
निर्यात का अत्यधिक केंद्रीकरण भी एक बड़ी चुनौती है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ईयू को होने वाला 70 प्रतिशत से ज्यादा निर्यात केवल पांच सदस्य देशों तक सीमित है. इससे भारतीय निर्यातकों के लिए ईयू के अन्य बाजारों में अवसर सीमित रह जाते हैं. एफटीए के जरिए टैरिफ में कटौती और बेहतर बाजार पहुंच मिलने से यह स्थिति बदल सकती है.
निवेश और भविष्य की संभावनाएं
ईयू न केवल भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है, बल्कि एक प्रमुख विदेशी निवेशक भी है. अप्रैल 2000 से दिसंबर 2024 तक ईयू ने भारत में 119.2 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया है, जो कुल एफडीआई का 16.5 प्रतिशत है. हालांकि 21.1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले ईयू की औसत वृद्धि दर सिर्फ 1.4 प्रतिशत है और जर्मनी, फ्रांस व इटली जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मंदी से जूझ रही हैं. इसके बावजूद एफटीए भारत के लिए निर्यात, निवेश और दीर्घकालिक व्यापार रणनीति के लिहाज से एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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