वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को पीटीआई को दिए इंटरव्यू में इस डील पर पहली प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए अच्छा संकेत है. उनके शब्दों में, “यह हमारे निर्यातकों के लिए अच्छा संकेत है.” उन्होंने उम्मीद जताई कि अब भारत के निर्यात बढ़ेंगे. उन्होंने कहा, “हमारे निर्यात अब तेजी से बढ़ेंगे, मेरी यही उम्मीद है… साथ ही नए बाजारों में भी हम काम करते रहेंगे.” सीतारमण ने एक्स पर पोस्ट भी किया, “मेड इन इंडिया उत्पादों के लिए अच्छी खबर. अब वे 18 प्रतिशत कम टैरिफ का सामना करेंगे.” उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और ट्रंप के नेतृत्व का शुक्रिया अदा किया और कहा कि दोनों बड़ी लोकतंत्रों के लोगों को फायदा होगा. पीटीआई से पहले ही वित्त मंत्री ने इसपर एक पॉजिटिव संकेत दिया था.
एक दिन पहले ही दिया था वित्त मंत्री ने पॉजिटिव संकेत
बजट पेश होने के बाद 2 फरवरी को नेटवर्क 18 ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी ने जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से यह सीधा सवाल पूछा कि ‘अमेरिका के साथ ट्रेड डील कब होगी? तो वित्त मंत्री ने सस्पेंस बरकरार रखते हुए एक बेहद नपा-तुला जवाब दिया. वित्त मंत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि इस बारे में बहुत स्पेकुलेट (अटकलें लगाना) नहीं करना चाहिए. बस देखते जाइए.” वित्तमंत्री से जब पूछा गया कि क्या आप सोचती हैं कि बात आगे बढ़ी है? इस पर सीतारमण ने कहा, ‘हमने यूरोपीय यूनियन के साथ एफटीए साइन किया है. यूके, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के साथ डील की है. तो काम चल रहा है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बात चल रही है.’
सीतारमण ने स्पष्ट किया कि डील मुख्य रूप से टैरिफ कम करने की है, बाकी डिटेल्स जल्द आएंगी. यह समझौता पीएम मोदी और ट्रंप के बीच फोन बातचीत के बाद हुआ. इससे भारतीय निर्यातकों, एमएसएमई और मजदूरों को बड़ा फायदा होगा. पिछले साल अगस्त से अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था, जिसमें रूसी तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ भी शामिल था. इससे भारतीय निर्यात प्रभावित हुए थे. कपड़े, जूते, ज्वेलरी, स्टील, एल्युमिनियम, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पाद जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर में ऑर्डर कम हुए, प्रतिस्पर्धा घटी और मार्जिन दबाव में आए.
भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड को मिलेगा बढ़ावा
भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस सितंबर से दिसंबर 2025 में औसतन हर महीने 2.5 अरब डॉलर कम हुआ. विदेशी निवेशकों ने जुलाई 2025 से 14 अरब डॉलर की इक्विटी निकाली क्योंकि बाजार में कमजोर भावना थी. अब 18 प्रतिशत टैरिफ से भारत अन्य एशियाई देशों जैसे वियतनाम और बांग्लादेश (20 प्रतिशत) से आगे निकल जाएगा, जहां टैरिफ 15-19 प्रतिशत के आसपास है. इससे मेड इन इंडिया उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी बनेगी और निर्यात बढ़ेगा. रूसी तेल खरीद बंद करने से पेनल्टी टैरिफ भी खत्म हो जाएगा, जिससे प्रभावी टैरिफ 18 प्रतिशत रह जाएगा. इस डील का बाजार में सकारात्मक असर दिखा, शेयर बाजार हरे निशान में बंद हुआ.
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