Indo-China Relationship : भारत और चीन के साथ संबंध अब सुधर रहे हैं और यह कारनामा हुआ है पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात से. अब दोनों के बीच रिश्तों में गर्माहट आ रही है.
भारत और चीन के रिश्ते में तेजी से सुधार आ रहा है.
चीन और भारत के बीच कारोबारी रिश्ते ऐसे समय में बेहतर हो रहे हैं, जब अमेरिका ने 50 फीसदी का मोटा टैरिफ लगा दिया था. हालांकि, अब अमेरिका भी पीछे हट गया और भारत के साथ बड़ी ट्रेड डील को हरी झंडी दे दी है. बावजूद इसके भारत और चीन का कारोबारी आंकड़ा नई ऊंचाई पर पहुंच गया है. चीनी नववर्ष के मौके पर चीन के राजदूत ने कहा कि साल 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार करीब 155.6 अरब डॉलर पहुंच गया है, जो एक रिकॉर्ड है. इसमें सालाना आधार पर 12 फीसदी की वृद्धि दिख रही है. इस दौरान भारत से चीन को होने वाला निर्यात भी 9.7 फीसदी बढ़ गया है. यह अलग बात है कि चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा भी करीब 100 अरब डॉलर के आसपास है.
चीन ने दिया तीर्थयात्रियों को रास्ता
चीन के राजदूत ने बताया कि संबंधों में गर्माहट आने का फायदा भारत के तीर्थयात्रियों को भी मिला है. चीन ने करीब 20 हजार भारतीय श्रद्धालुओं को तिब्बत क्षेत्र के पवित्र स्थलों की यात्रा करने की अनुमति दी है. प्रसिद्ध मानसरोवर यात्रा के लिए भी चीन की सरकार ने सहमति जताई है और भारतीय नागरिकों की यात्रा को आसान बनाने के लिए हामी भरी है. चीन के साथ रिश्ते खराब पर कई साल तक मानसरोवर यात्रा पर प्रतिबंध लगा हुआ था, जिसे दोबारा बहाल किया जा चुका है.
भारत ने भी खोले अपने दरवाजे
रिश्तों में सुधार आने के साथ ही भारत ने भी चीनी नागरिकों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं. कई साल तक बंद रही वीजा सुविधा को दोबारा शुरू किया जा रहा है. साथ ही दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी बहाल हो चुकी हैं. चीनी राजदूत का कहना है कि उनका देश भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि लोगों से संपर्क मजबूत करने और वैश्विक दक्षिण के विकास के लिए साथ काम करने को तैयार हैं.
ब्रिक्स की जुगलबंदी से नया संदेश
चीन के राजदूत ने कहा है कि ब्रिक्स में भारत की अहम भूमिका है और इसका हम स्वागत करते हैं. ब्रिक्स में शामिल होने के बाद से चीन, भारत और रूस ने मिलकर अमेरिका के लिए चुनौती खड़ी कर दी है. ब्रिक्स के मंच ने नई मुद्रा के ट्रेड में इस्तेमाल के ऐलान ने तो ट्रंप को बेकाबू ही कर दिया था. उन्होंने खुलेआम ब्रिक्स देशों को धमकियां तक दे डाली थी. यह चीन और भारत संयुक्त ताकत ही थी, जिसने अमेरिका को डरा दिया था. ट्रंप को लगने लगा था कि अगर ब्रिक्स ने डॉलर के बजाय अपनी करेंसी में व्यापार करना शुरू कर दिया तो अमेरिकी मुद्रा पर संकट आ जाएगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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