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होली के बाद खुल रहे बाजार में गिरावट की आशंका गहरा गई है. गिफ्ट निफ्टी में करीब 600 अंकों की बड़ी कमजोरी दर्ज की गई है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की तेजी से निवेशक चिंतित हैं. वैश्विक बाजारों में बिकवाली का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है.
गिफ्ट निफ्टी 600 अंक टूटा, कच्चे तेल में आग से निवेशकों की धड़कन तेज. (Image:AI)
एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली, कोस्पी 7% टूटा
वैश्विक बाजारों में भी घबराहट का माहौल है. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 7 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया, जो 2024 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है. दिग्गज चिप कंपनियों Samsung Electronics और SK Hynix में लगभग 10 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई. जापान का Nikkei 225 तीन प्रतिशत से ज्यादा गिरा, जबकि हांगकांग का Hang Seng और चीन का SSE Composite भी एक प्रतिशत से अधिक फिसले. यूरोप में Stoxx Europe 600 करीब 2.5 प्रतिशत नीचे ट्रेड करता दिखा. वहीं अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स भी 2 प्रतिशत तक गिर गए, जो वॉल स्ट्रीट की कमजोर शुरुआत की ओर इशारा कर रहे हैं.
कच्चे तेल में उछाल, महंगाई और मुनाफे पर दबाव
तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. सोमवार को इसमें 7 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई थी. ईरान ने सऊदी अरब के रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमले की खबरों के बीच होरमुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी दी है. यह रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से एशियाई कंपनियों की लागत बढ़ने का खतरा है. ऊंची इनपुट लागत मुनाफे पर दबाव डाल सकती है और महंगाई बढ़ा सकती है. भारत जैसे आयातक देश पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.
सोमवार को भी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव दिखा
सोमवार को भी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव दिखा था. सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 2,700 अंकों से ज्यादा टूट गया था, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी आई और यह करीब 1,048 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ. निफ्टी भी दिन में 575 अंक तक फिसला और अंत में 312 अंकों की कमजोरी के साथ बंद हुआ. मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता, तब तक निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए. ऊर्जा कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज हो सकती है. ऐसे माहौल में आईटी, बैंकिंग और ऑटो जैसे सेक्टरों में भी अस्थिरता देखने को मिल सकती है. विश्लेषकों की सलाह है कि निवेशक घबराहट में फैसले लेने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति पर टिके रहें और पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखें.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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