Iran War Effect on India : ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था और विकास दर पर भी पड़ सकता है. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच की इकाई ने दावा किया है इससे भारत में निवेश प्रभावित होगा और जीडीपी को भी 0.5 फीसदी तक झटका लग सकता है. साथ ही हाल में किए गए व्यापार समझौतों का लाभ भी सीमित हो सकता है.
फिच ने दावा किया है कि ईरान युद्ध से भारत को एफटीए का लाभ सीमित हो सकता है.
रिपोर्ट कहती है कि मार्च से अनिश्चितता में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका है. हमें लगता है कि इससे भारत में निवेश हतोत्साहित होगा, जिससे ईयू और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों का सकारात्मक प्रभाव आंशिक रूप से कम हो सकता है. अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन एवं मिसाइलें दागीं हैं.
होर्मुज का रास्ता बंद होने से असर
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है कि जो भी यहां से जाएगा, उस पर गोलीबारी हो सकती है. यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है. शोध एवं विश्लेषण फर्म बीएमआई ने कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हो जाता है, तो तेल एवं गैस कीमतों में वृद्धि के कारण भारत की जीडीपी पर 0.5 फीसदी तक का प्रत्यक्ष नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है.
एनर्जी पर सबसे ज्यादा चिंता
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 88 फीसदी आयात करता है. तेल कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल बढ़ेगा और ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा. भारत और अमेरिका ने पिछले महीने अंतरिम व्यापार समझौते की एक रूपरेखा पर सहमति जताई थी, जिसके तहत शुल्क को घटाकर 18 फीसदी किए जाने का प्रस्ताव है. हालांकि, इसे लागू करने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इस बीच, अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने फरवरी में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक जवाबी शुल्क को अवैध करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत मिले अधिकारों से अधिक कदम उठाया.
सीमित हो सकता है एफटीए का फायदा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 फीसदी शुल्क लगा दिया है. इस शुल्क को बाद में 15 फीसदी तक बढ़ाने की घोषणा भी की गई लेकिन इस पर अभी कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है. उधर, भारत और यूरोपीय संघ के बीच जनवरी में मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सहमति बनी. इस समझौते को कानूनी अनुमोदन मिलने के बाद एक वर्ष के भीतर लागू किया जाएगा, लेकिन हालिया गतिरोध के कारण भारत के लिए इसका फायदा सीमित हो सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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