Investment Tips : ईरान, अमेरिका और इजराइल लड़ रहे हैं तो दुनिया के सामने एक बार फिर नया संकट उभरता दिख रहा है. इस लड़ाई से सबसे ज्यादा निवेशकों को परेशानी है और वे समझ नहीं पा रहे कि अभी पैसा कहां लगाएं. शेयर बाजार में अनिश्चितता का माहौल है तो सोने और चांदी की चाल भी समझ नहीं आ रही. उनके इस असमंजस पर एक्सपर्ट ने अपनी राय दी है, जो निवेशकों को मौजूदा हालात में पोर्टफोलियो बनाने में मददगार साबित हो सकती है.
ईरान संकट के बीच गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में कौन सा बेहतर विकल्प है.
मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) में ईटीएफ प्रोडक्ट हेड और फंड मैनेजर सिद्धार्थ श्रीवास्तव का कहना है कि जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, उस समय गोल्ड ईटीएफ आमतौर पर सबसे सुरक्षित विकल्प के रूप में काम करता है. वहीं, सिल्वर ईटीएफ भी जोखिम से बचाव के समय भाग लेता है, लेकिन उस पर औद्योगिक मांग का ज्यादा असर होता है. ऐसे में दोनों को पोर्टफोलियो में शामिल करना स्थिरता और रणनीतिक लाभ का संतुलन देता है. हालांकि, गोल्ड ईटीएफ में निवेश का अनुपात ज्यादा होना चाहिए.
…तो क्या गोल्ड ईटीएफ ही बेस्ट
एसेट एलिक्सिर के फाउंडर और सीएफपी शिवम पाठक ने भी कहा कि अमेरिका-इजरायल-ईरान जैसे भू-राजनीतिक संघर्ष के समय गोल्ड ईटीएफ सबसे सुरक्षित विकल्प है, क्योंकि यह पूरी तरह से सुरक्षित संपत्ति है और अनिश्चितता के समय सबसे पहले प्रतिक्रिया करता है. सिल्वर ईटीएफ में भी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन उसमें औद्योगिक मांग के कारण ज्यादा उतार-चढ़ाव रहता है. लिहाजा दोनों में निवेश करना ठीक है, लेकिन गोल्ड ईटीएफ में ज्यादा निवेश करना चाहिए. युद्ध शुरू होने के बाद से फिलहाल दोनों ही धातुओं की कीमतों में लगातार उछाल दिख रहा है.
कितनी होनी चाहिए ईटीएफ की हिस्सेदारी
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक अपने कुल पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं के ETF में 10-15% अलोकेशन रख सकते हैं, जिसमें स्थिरता के लिए गोल्ड ETF की हिस्सेदारी ज्यादा होनी चाहिए. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक ज्यादा सतर्क हो गए हैं और उन्होंने इक्विटी से पैसा निकालकर गोल्ड और सिल्वर जैसे सुरक्षित निवेश में लगाना शुरू कर दिया है. दुनिया का 20% से ज्यादा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है, जो पर्शियन गल्फ को गल्फ ऑफ ओमान और अरब सागर से जोड़ता है. इस इलाके में भारी मिसाइल हमलों के कारण सप्लाई में बाधा की चिंता बढ़ गई है, जिससे तेल की कीमतों में उछाल आया है.
कैसे पड़ता है गोल्ड और सिल्वर पर असर
मजबूत अमेरिकी डॉलर आमतौर पर गोल्ड और सिल्वर दोनों पर दबाव डालता है और गोल्ड ब्याज दरों और करेंसी मूवमेंट के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है. जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई की चिंता भी बढ़ती है, जिससे आमतौर पर गोल्ड को सपोर्ट मिलता है. सिल्वर भी इन कारकों से प्रभावित होता है, लेकिन यह वैश्विक आर्थिक विकास पर भी निर्भर करता है, जिससे इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. यही वजह है कि मौजूदा हालात में सोने में निवेश करना बेहतर फैसला हो सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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