सोना और चांदी की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद अचानक आई गिरावट ने बाजार की असली तस्वीर दिखा दी. क्या यह तेजी कमाई का मौका थी या सट्टेबाजों का जाल, इस पर बहस तेज है. इसी मुद्दे पर दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने निवेशकों को अहम चेतावनी दी है.
सोना-चांदी में तेज उतार-चढ़ाव क्यों खतरनाक: विजय केडिया ने इतिहास से दिया सबक. (Image:News18)
रिकॉर्ड हाई से अचानक फिसली कीमतें
हाल ही में सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था, जबकि चांदी भी 121 डॉलर से ऊपर निकल गई थी. लेकिन यह तेजी ज्यादा समय टिक नहीं पाई. कुछ ही दिनों में सोना फिसलकर करीब 4,900 डॉलर और चांदी करीब 75 डॉलर के आसपास आ गई. इस गिरावट ने हालिया मुनाफे का बड़ा हिस्सा मिटा दिया. केडिया के मुताबिक इतनी तेज चाल सामान्य निवेश से नहीं, बल्कि सट्टेबाजी से आती है.
स्पेकुलेटर्स चला रहे हैं बाजार
सोशल मीडिया पर वायरल एक इंटरव्यू में विजय केडिया ने साफ कहा कि इस तेजी के पीछे लंबे समय के निवेशक नहीं, बल्कि स्पेकुलेटर्स हैं. उनके शब्दों में, ‘यह निवेशकों का बाजार नहीं है, यह सट्टेबाजों का खेल है.’ केडिया ने चेतावनी दी कि ऐसी पराबोलिक तेजी अक्सर दर्दनाक गिरावट पर खत्म होती है. खुदरा निवेशकों को चमकदार तेजी देखकर बिना सोचे-समझे कूदने से बचना चाहिए.
इतिहास से मिलती है बड़ी चेतावनी
केडिया ने 1980 के ‘सिल्वर थर्सडे’ का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे हंट ब्रदर्स ने चांदी की सप्लाई पर कब्जा करने की कोशिश की थी. उस दौर में चांदी 1.5 डॉलर से 50 डॉलर तक पहुंच गई, लेकिन नियमों में सख्ती होते ही कीमतें गिरकर 6 डॉलर रह गईं. इसके बाद चांदी को दोबारा 50 डॉलर तक पहुंचने में करीब 40 साल लग गए. इसी तरह 2011 में भी चांदी 50 डॉलर पार कर फिर 11 डॉलर तक टूट गई थी. केडिया के मुताबिक इतिहास खुद को दोहराता है.
खुदरा निवेशकों के लिए क्या सबक
विजय केडिया ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कई लोग पहले सट्टेबाजी करते हैं और गिरावट आने पर खुद को निवेशक बताने लगते हैं. उन्होंने कहा कि ‘धातु में जब ज्यादा गर्मी होती है, तो वह पिघलती जरूर है.’ उनके अनुसार सोना और चांदी लंबे समय में सुरक्षित साधन हो सकते हैं, लेकिन अचानक और बेहद तेज तेजी भरोसेमंद नहीं होती. खुदरा निवेशकों को भावनाओं में बहने के बजाय धैर्य, समझदारी और जोखिम प्रबंधन के साथ ही ऐसे बाजार में कदम रखना चाहिए.
About the Author
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.