Crude Refining Cost : आपको पता है कि ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जिसका मतलब है कि एक लीटर की कीमत करीब 37 रुपये पड़ेगी, लेकिन बाजार में पेट्रोल और डीजल तो 100 रुपये के करीब पहुंच जाता है. आखिर इसकी कीमतों में इतना उछाल आता कैसे है.
सबसे पहले आपको बताते हैं कि 1 बैरल कच्चे तेल में एक लीटर का भाव क्या होता है. मान लीजिए कि अभी ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का भाव 65 डॉलर (5,980 रुपये) प्रति बैरल चल रहा है और एक बैरल में 159 लीटर क्रूड होता है. इस तरह, एक लीटर क्रूड का भाव 37.61 रुपये के आसपास आएगा. लेकिन, रिफाइनिंग का खर्चा और टैक्स जोड़ने के बाद इससे बने पेट्रोल और डीजल की कीमत करीब ढाई गुना हो जाती है.
एक बैरल क्रूड में कितना तेल
पेट्रोल-डीजल पर खर्चे और इसकी कीमत का गणित बताने से पहले यह समझते हैं कि आखिर एक बैरल क्रूड में से कितने लीटर पेट्रोल-डीजल निकलते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि 1 बैरल में भले ही 159 लीटर कच्चा तेल होता है, लेकिन प्रोसेसिंग के बाद इसमें से करीब 170 लीटर तेल निकलता है. इसमें सबसे ज्यादा 72 से 78 लीटर पेट्रोल निकलता है, जबकि 38 से 46 लीटर तक डीजल भी निकल आता है. इतना ही नहीं, 15 से 19 लीटर तक जेट फ्यूल यानी एटीएफ भी निकलता है. 8 से 10 लीटर एलपीजी भी इसमें निकलता है, जबकि 20 से 30 लीटर पेटकोक, नाफ्था, ल्यूब्स आदि निकलता है.
1 बैरल की रिफाइनिंग में कितना खर्चा
1 बैरल कच्चा तेल यानी 159 लीटर को रिफाइन करने में औसतन 3 से 5 डॉलन यानी करीब 450 रुपये का खर्चा आता है. इसमें रिफाइनिंग में लगने वाली एनर्जी, मजदूरी और रखरखाव आदि शामिल है. इसका मतलब है कि प्रति लीटर करीब 3 रुपये का खर्चा आता है. लेकिन, तेल तैयार होने के बाद वह जिस कॉस्ट में बेचा जाता है, उससे रिफाइनिंग कंपनियों को प्रति लीटर 4 से 6 रुपये का मुनाफा होता है. इसका मतलब है कि एक बैरल क्रूड रिफाइन करने पर करीब 70 रुपये का मुनाफा कंपनियां कमाती हैं.
कैसे इतना महंगा हो जाता है पेट्रोल-डीजल
रिफाइन होने के बाद जो तेल तैयार होता है, उसके बाजार तक आने में कई कंपोनेंट जुड़ जाते हैं, जिससे यह इतना महंगा हो जाता है. इसमें रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन खर्च करीब 6 रुपये जुड़ता है, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनी का मार्जिन 8 से 11 रुपये प्रति लीटर और डीलर का कमीशन करीब 4 रुपये प्रति लीटर जुड़ता है. इन खर्चों के बाद बारी आती है टैक्स की, जहां केंद्र सरकार की ओर से करीब 20 रुपये एक्साइज ड्यूटी लगती है तो राज्यों की ओर से 25 से 30 रुपये प्रति लीटर का वैट लगाया जाता है. इस तरह, कुल कीमत पहुंच जाती है 100 रुपये प्रति लीटर के पार. यह खर्चा पेट्रोल और डीजल दोनों पर आता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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