बात 18 फरवरी की है, जब हरियाणा सरकार की कुछ संस्थाओं ने बैंक से अपने खाते बंद करने और फंड ट्रांसफर करने को कहा. जब मिलान किया गया, तो आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया. जांच की परतें खुलीं तो पता चला कि चंडीगढ़ शाखा के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर जाली दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के जरिए लगभग 590 करोड़ रुपये ठिकाने लगा दिए थे. बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने निवेशकों से बात करते हुए इस पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा, “यह कोई डिजिटल ट्रांजैक्शन नहीं था. लोग जाली चेक लेकर आए थे. यह शायद बैंकिंग जगत का सबसे पुराना और जाना-पहचाना फ्रॉड है.”
एक तिमाही की पूरी कमाई पर फिरा पानी
इस धोखाधड़ी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गबन की गई 590 करोड़ रुपये की राशि बैंक के पिछली तिमाही (Q3) के कुल शुद्ध लाभ से भी ज्यादा है. बैंक ने पिछली तिमाही में 503 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था. यानी एक शहर की एक ब्रांच ने बैंक की 3 महीनों की पूरी मेहनत पर एक झटके में डुबो दिया. वी. वैद्यनाथन ने स्पष्ट किया कि इसमें बैंक के ऊपरी प्रबंधन का कोई हाथ नहीं है. उन्होंने कहा, “जहां तक हमें अभी समझ आ रहा है, इसमें सीनियर मैनेजमेंट की कोई भूमिका नहीं है. यह मामला केवल एक ब्रांच और कुछ सरकारी खातों तक ही सीमित है, जिससे बाकी ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है.”
बैंक अब उस पैसे का पीछा कर रहा है. मैनेजमेंट का कहना है कि यदि पैसा अभी भी बैंकिंग सिस्टम के भीतर है, तो उसे फ्रीज करना संभव होगा. इसके लिए अन्य बैंकों को ‘रिकॉल रिक्वेस्ट’ भेजी गई है. हालांकि, असल नुकसान कितना होगा, यह तो KPMG की फोरेंसिक ऑडिट और पुलिस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा. वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यह बैंक के साल भर के मुनाफे का लगभग 20% से 28% हिस्सा प्रभावित कर सकता है.
सिस्टम सही था, नीयत खराब निकली
हैरानी की बात यह है कि IDFC फर्स्ट बैंक खुद को एक ‘टेक्नोलॉजी फोकस्ड’ बैंक मानता है, जहां मेकर-चेकर जैसी सख्त प्रक्रियाएं और एसएमएस अलर्ट की सुविधाएं मौजूद हैं. जब वी. वैद्यनाथन से पूछा गया कि इतने सुरक्षा घेरों के बावजूद यह कैसे हुआ, तो उनका जवाब था कि सिस्टम तो अपनी जगह सही काम कर रहा था, लेकिन इंसानी मिलीभगत ने उसे नाकाम कर दिया. उन्होंने भरोसा दिलाया, “हम पिछले 10 साल से काम कर रहे हैं और हमारी 1,000 से ज्यादा शाखाएं हैं, लेकिन आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ. हम भविष्य में अपने कंट्रोल को और भी सख्त करेंगे.”
इस घटना का असर केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा. हरियाणा सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को अपनी सूची से बाहर (De-empanel) कर दिया है और सभी विभागों को अपने खाते बंद करने के निर्देश दिए हैं. फिलहाल बैंक ने संदिग्ध 4 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. अब सबकी नजरें KPMG की रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि यह सिर्फ पैसों की बात नहीं, बल्कि भरोसे की भी है.
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