नए कानून को जमीन पर उतारने की तैयारी
नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 यह तय करता है कि कानून क्या कहता है, जबकि ड्राफ्ट नियम यह बताते हैं कि उसे व्यवहार में कैसे लागू किया जाएगा. टैक्स वैल्यूएशन, रिटर्न फाइलिंग, गणना के तरीके और प्रक्रियाओं को इन्हीं नियमों के जरिए स्पष्ट किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों को पहले जारी करने से टैक्सपेयर्स और प्रोफेशनल्स को तैयारी का पूरा समय मिलेगा और नए कानून के लागू होने पर भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी.
60 साल पुरानी व्यवस्था की होगी विदाई
प्रस्तावित नियम 1962 के इनकम टैक्स रूल्स की जगह लेंगे, जो 1961 के आयकर कानून के साथ छह दशकों से ज्यादा समय तक लागू रहे. सरकार का उद्देश्य कर प्रशासन को आधुनिक बनाना और कानून को आसान भाषा में पेश करना है. खास बात यह है कि पुराने कानून में मौजूद 511 नियमों की संख्या घटाकर 323 कर दी गई है, जिससे सिस्टम ज्यादा सरल और समझने योग्य बनेगा. इससे करदाताओं पर बोझ कम होने और विभाग के साथ विवाद घटने की उम्मीद है.
सरल भाषा और तकनीक पर जोर
ड्राफ्ट नियमों की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरल भाषा और स्पष्ट ढांचा है. जहां जरूरत है वहां टेबल और फॉर्मूले दिए गए हैं, ताकि नियमों की व्याख्या में भ्रम न हो. सरकार ने संकेत दिया है कि टैक्स फॉर्म्स को भी मानकीकृत किया जा रहा है. नए फॉर्म्स में प्री-फिल डेटा, ऑटोमैटिक रिकंसीलिएशन और टेक्नोलॉजी आधारित प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं होंगी, जिससे रिटर्न फाइलिंग ज्यादा आसान और तेज हो सकेगी.
किन अहम पहलुओं को किया गया कवर
ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स में कई व्यावहारिक मुद्दों पर स्पष्टता दी गई है. इसमें संपत्तियों का फेयर मार्केट वैल्यू तय करने का तरीका, कैपिटल एसेट्स की होल्डिंग पीरियड की गणना, सरल आयकर रिटर्न फॉर्मेट और मानकीकृत प्रक्रियाएं शामिल हैं. जानकारों के मुताबिक, नियमों में साफ दिशा-निर्देश होने से वे विवाद कम होंगे, जो अब तक नियमों की अस्पष्टता के कारण पैदा होते रहे हैं.
आगे की प्रक्रिया क्या होगी
फिलहाल जारी किए गए नियम अंतिम नहीं हैं. टैक्स एक्सपर्ट्स, उद्योग संगठन और अन्य स्टेकहोल्डर्स 22 फरवरी तक अपने सुझाव दे सकते हैं. इन सुझावों पर विचार के बाद सरकार संशोधित नियमों को अधिसूचित करेगी. इसके बाद ये नियम नए इनकम टैक्स एक्ट के साथ 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. माना जा रहा है कि ड्राफ्ट नियमों के बाद नए आयकर रिटर्न फॉर्म्स भी जल्द जारी किए जाएंगे, जिससे देश की टैक्स प्रणाली एक नए और सरल दौर में प्रवेश करेगी.
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