इस मौके पर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अब भारत में प्रोडक्ट डेफिनिशन से लेकर डिजाइन, वेरिफिकेशन और टेप आउट तक पूरा चिप डेवलपमेंट हो रहा है. उन्होंने बताया कि क्वालकॉम का यह दुनिया के बाहर सबसे बड़ा डिजाइन सेंटर है और यहां बने डिजाइन सीधे फैक्ट्री में भेजे जा रहे हैं, जहां असली चिप तैयार होती है.
वेफर क्या होता है
वेफर एक बड़ी गोल और बेहद पतली सिलिकॉन प्लेट होती है, जिस पर हजारों माइक्रोचिप्स एक साथ बनाए जाते हैं. इसे आप एक बड़ी पिज्जा शीट की तरह समझ सकते हैं, जिसमें कई छोटे टुकड़े मार्क किए होते हैं. हर वेफर पर सैकड़ों या हजारों छोटे डिजाइन प्रिंट किए जाते हैं, जिन्हें बाद में काटकर अलग किया जाता है. यही वेफर सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की शुरुआत होती है और इसी पर पूरी दुनिया के मोबाइल, लैपटॉप और एआई सिस्टम के दिमाग बनाए जाते हैं.
डाई क्या होता है और क्यों है यह असली ब्रेन
वेफर पर बने हर छोटे चौकोर या आयताकार हिस्से को डाई कहा जाता है. एक डाई असल में पूरा कंप्यूटर ब्रेन होता है, जिसमें सीपीयू, जीपीयू और अन्य यूनिट्स शामिल होती हैं. अश्विनी वैष्णव ने जिस वेफर को दिखाया, उसमें हर डाई में 20 से 30 अरब ट्रांजिस्टर मौजूद हैं. जब वेफर को काटा जाता है तो हर डाई अलग यूनिट बन जाती है, जो बाद में माइक्रोचिप बनती है.
माइक्रोचिप क्या होती है, फोन या लैपटॉप में कैसे जाती है
जब डाई को वेफर से काट लिया जाता है, टेस्ट किया जाता है और फिर एक खास पैकेज में बंद किया जाता है, तो उसे माइक्रोचिप कहा जाता है. यही वह ब्लैक या मेटल बॉक्स होता है, जिसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार या सर्वर में लगाया जाता है. आम भाषा में जब लोग क्वालकॉम का 2nm चिप कहते हैं, तो वे इसी पैकेज्ड डाई की बात करते हैं.
ट्रांजिस्टर क्या होते हैं और अरबों की संख्या क्यों जरूरी है
ट्रांजिस्टर किसी भी चिप का सबसे छोटा और जरूरी हिस्सा होता है. यह एक बेहद छोटा इलेक्ट्रॉनिक स्विच होता है, जो ऑन और ऑफ होता रहता है. हर फोटो, वीडियो, ऐप, गेम और एआई कैलकुलेशन अरबों ट्रांजिस्टर के ऑन और ऑफ होने से ही काम करता है. जितने ज्यादा ट्रांजिस्टर, उतनी ज्यादा ताकत, तेज स्पीड और कम बिजली खर्च. पुराने जमाने की चिप्स में कुछ लाख या मिलियन ट्रांजिस्टर होते थे, जबकि आज की 2nm चिप में 20 से 30 अरब ट्रांजिस्टर होते हैं, वह भी नाखून के आकार के टुकड़े में.
क्या भारत यह 2nm चिप बना भी रहा है
अभी भारत में यह चिप बन नहीं रही है. क्वालकॉम एक फैबलेस कंपनी है, यानी यह डिजाइन बनाती है लेकिन फैक्ट्री में निर्माण नहीं करती. असली मैन्युफैक्चरिंग ताइवान की टीएसएमसी (TSMC) जैसी फैक्ट्रियों में होती है, जो 2nm टेक्नोलॉजी में लीडर हैं. भारत में अभी गुजरात के धोलेरा जैसे प्रोजेक्ट्स 28nm और उससे पुराने प्रोसेस से शुरुआत कर रहे हैं. 2nm जैसी एडवांस फैब्स का लक्ष्य 2030 से 2035 के आसपास रखा गया है.
भारत के लिए यह क्यों बड़ी खबर है
यह पहली बार है जब भारत में एंड टू एंड 2nm चिप डिजाइन किया गया है, यानी आर्किटेक्चर से लेकर फाइनल लेआउट तक पूरा काम भारतीय इंजीनियर्स ने किया है. इससे हजारों हाई पेइंग जॉब्स आएंगी, टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और भविष्य में भारत फोन, ईवी, डिफेंस और एआई के लिए जरूरी दिमाग खुद बना सकेगा. यह भारत के लिए डिजाइन इन इंडिया से टेक पावरहाउस बनने की दिशा में बड़ा कदम है.
आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है
भले ही यह चिप अभी ताइवान में बने, लेकिन इसका डिजाइन भारत में होने से टेक्नोलॉजी की ताकत भारत के हाथ में आती है. भविष्य में इससे ज्यादा फास्ट मोबाइल, स्मार्ट कार, एआई सिस्टम और मेडिकल डिवाइस भारत के इंजीनियर्स के दिमाग से निकलेंगे. यह सिर्फ टेक खबर नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल और इंडस्ट्रियल पावर बनने की कहानी की शुरुआत है.
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