नए नियमों का मुख्य उद्देश्य कर चोरी को रोकना और डेटा के माध्यम से करदाताओं की आय पर बारीकी से नजर रखना है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि भले ही रिटर्न फॉर्म्स के नाम (ITR-1 से 7) पुराने जैसे ही दिखें, लेकिन उनके भीतर मांगी जाने वाली जानकारी और पात्रता की शर्तें काफी बदल गई हैं.
ITR-1 (सहज) भरना होगा आसान
ITR-1 या ‘सहज’ फॉर्म सबसे ज्यादा भरे जाने वाला फार्म है. नए नियमों के अनुसार, यह फॉर्म अभी भी उन निवासी व्यक्तियों के लिए है जिनकी आय वेतन, एक मकान संपत्ति और बैंक ब्याज जैसे सामान्य स्रोतों से होती है. हालांकि, अब इसे पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया है. कागजी फाइलिंग का विकल्प अब केवल उन ‘सुपर सीनियर सिटीजन्स’ के लिए बचा है जिनकी आयु 80 वर्ष या उससे अधिक है. बाकी करदाताओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) या डिजिटल सिग्नेचर (DSC) अनिवार्य होगा. इसके अलावा, यदि आपकी आय के स्रोतों में थोड़ी भी जटिलता आती है तो आप सहज फॉर्म नहीं भर पाएंगे.
ITR-2 और ITR-3
उन व्यक्तियों के लिए जिनकी आय व्यापार से नहीं है लेकिन जो कैपिटल गेन (शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी की बिक्री), विदेशी आय, या एक से अधिक मकानों से किराया प्राप्त करते हैं, ITR-2 डिफॉल्ट विकल्प बना रहेगा. नए नियमों के तहत, कैपिटल गेन की गणना के लिए अब और अधिक विस्तृत विवरण देने होंगे.
ITR-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए है जो व्यापार या पेशे से आय अर्जित करते हैं. ड्राफ्ट नियमों में संकेत दिया गया है कि यदि कोई करदाता ‘अनुमानित कराधान’ (Presumptive Taxation) योजना से बाहर निकलने का विकल्प चुनता है, तो उसे ITR-3 के माध्यम से अपने खातों का विस्तृत ऑडिट और विवरण देना अनिवार्य होगा. इसमें विशेष रूप से ‘परिक्विज़िट्स’ और जटिल व्यावसायिक आय पर अधिक ध्यान दिया गया है.
ITR-4 (सुगम) की पात्रता शर्तों में बड़ा बदलाव
सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव ITR-4 या ‘सुगम’ फॉर्म में देखा गया है. पहले छोटे व्यापारी और पेशेवर इसे एक आसान विकल्प के रूप में यूज करते थे, लेकिन अब सरकार ने इसके दरवाजे कई श्रेणियों के लिए बंद कर दिए हैं. नए नियमों के अनुसार, आप ITR-4 नहीं भर पाएंगे यदि:
- आपकी कुल वार्षिक आय 50 लाख रुपये से अधिक है.
- आप किसी कंपनी में निदेशक (Director) के पद पर हैं.
- आपने वर्ष के दौरान अनलिस्टेड इक्विटी शेयरों में निवेश किया है.
- आपकी कृषि आय 5,000 रुपये से अधिक है.
आपके पास विदेशी संपत्ति है या विदेश से कोई आय प्राप्त हुई है. यह स्पष्ट है कि सरकार ‘सुगम’ का लाभ केवल वास्तव में छोटे और सूक्ष्म करदाताओं तक ही सीमित रखना चाहती है.
ITR-5, 6 और 7
फर्मों, LLP और कंपनियों के लिए इस्तेमाल होने वाला ITR-5 और ITR-6 में ज्यादा बदलाव नहीं हुए हैं. लेकिन डिजिटल रिपोर्टिंग के मानकों को काफी ऊंचा कर दिया गया है. कंपनियों के लिए अब हर स्तर पर डिजिटल सिग्नेचर अनिवार्य होगा. सबसे अधिक सख्ती ITR-7 भरने वाली संस्थाओं, जैसे चैरिटेबल ट्रस्ट्स और राजनीतिक दलों पर की गई है. नए नियमों के तहत इन संस्थाओं को अपने फंड के इस्तेमाल, प्राप्त दान और ऑडिट रिपोर्ट की एक-एक पाई का हिसाब अधिक पारदर्शिता के साथ देना होगा.
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