भारत में 18 प्रतिशत सरकारी उपक्रम निष्क्रिय पड़े हैं, जिनमें टैक्सपेयर्स के हजारों करोड़ रुपये फंसे हैं. बिहार में संपत्ति विवाद, असम में ‘लापता’ कंपनियां और केंद्र के अटके हुए प्रोजेक्ट्स दिखाते हैं कि किसी मृत इकाई को बंद करना कितना जटिल है. 16वें वित्त आयोग ने राजकोषीय दबाव कम करने के लिए इन्हें तत्काल बंद करने की सलाह दी है.
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