रिजर्व बैंक का डिजिटल भुगतान सूचकांक (DPI) सितंबर 2025 तक उछलकर 516.76 पर पहुंच गया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल फास्ट-पेमेंट सिस्टम माना है. ग्लोबल रियल-टाइम पेमेंट मार्केट में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया में पहले स्थान पर बरकरार है.
आरबीआई के अनुसार, इस सूचकांक में आई बढ़त का मुख्य कारण पेमेंट परफॉरमेंस और पेमेंट इनेबलर्स जैसे मानकों में जबरदस्त वृद्धि होना है. साल 2018 को आधार वर्ष मानकर शुरू किया गया यह इंडेक्स बताता है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कैशलेस इकोनॉमी की दिशा में लंबी छलांग लगाई है. विशेष रूप से यूपीआई (UPI) जैसे प्लेटफॉर्म्स ने आम नागरिकों के लिए भुगतान की प्रक्रिया को बेहद सरल और तेज बना दिया है.
कैसे मापा जाता है डिजिटल भुगतान का स्तर?
आरबीआई ने डिजिटल भुगतान की गहराई और पहुंच को मापने के लिए जनवरी 2021 से इस कंपोजिट इंडेक्स की शुरुआत की थी. इसमें मार्च 2018 को आधार (स्कोर 100) माना गया है. यह सूचकांक पांच मुख्य मापदंडों पर आधारित है, जिनमें पेमेंट परफॉरमेंस को सबसे अधिक 45 प्रतिशत का वेटेज दिया गया है. इसके अलावा पेमेंट इनेबलर्स (25%), भुगतान बुनियादी ढांचा (मांग और आपूर्ति पक्ष – 10-10%) और उपभोक्ता केंद्रितता (5%) के आधार पर हर छह महीने में डेटा जारी किया जाता है.
दुनिया में यूपीआई का दबदबा
डिजिटल भुगतान के मामले में भारत अब दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है. आईएमएफ (IMF) ने जून 2025 की अपनी रिपोर्ट में यूपीआई को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल फास्ट-पेमेंट सिस्टम घोषित किया है. यूपीआई की वजह से ही भारत आज वैश्विक स्तर पर डिजिटल लेनदेन के मामले में शीर्ष पर है. यह न केवल शहरी क्षेत्रों में बल्कि ग्रामीण भारत में भी वित्तीय समावेशन का बड़ा जरिया बना है.
ग्लोबल रियल-टाइम पेमेंट में भारत नंबर-1
एसीआई वर्ल्डवाइड (ACI Worldwide) की ‘प्राइम टाइम फॉर रियल-टाइम’ रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम में भारत की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत है. 129.3 बिलियन ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के साथ भारत इस सूची में पहले स्थान पर है. तुलनात्मक रूप से देखें तो ब्राजील 14 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे, थाईलैंड 8 प्रतिशत के साथ तीसरे और चीन मात्र 6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ चौथे स्थान पर है. यह आंकड़े साफ करते हैं कि भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित देशों के मुकाबले कहीं अधिक उन्नत हो चुका है.
डिजिटल क्रांति के प्रमुख आंकड़े
इंडेक्स में बढ़त: मार्च 2025 के 493.22 से बढ़कर सितंबर 2025 में 516.76 हुआ स्कोर.
आधार वर्ष की तुलना: 2018 में जो स्कोर 100 था, वह सात वर्षों में पांच गुना से अधिक बढ़ चुका है.
वैश्विक हिस्सेदारी: ग्लोबल रियल-टाइम ट्रांजैक्शन में भारत का योगदान लगभग आधा (49%) है.
प्रतिस्पर्धी देश: भारत (129.3 बिलियन) के मुकाबले ब्राजील (37.4 बिलियन) और चीन (17.2 बिलियन) काफी पीछे हैं.
ग्रोथ फैक्टर्स: पेमेंट इनेबलर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार ने इस वृद्धि को रफ्तार दी है.
भविष्य की राह और वित्तीय समावेशन
आरबीआई का यह इंडेक्स केवल नंबर नहीं है, बल्कि यह देश के बदलते वित्तीय व्यवहार का प्रमाण है. जिस तरह से यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों का विस्तार हो रहा है, उससे आने वाले समय में पेपरलेस और कैशलेस इकोनॉमी की नींव और मजबूत होगी. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा भारत के इस मॉडल की सराहना यह साबित करती है कि ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान अब वैश्विक मानकों को तय कर रहा है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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