सरकार सूत्रों के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल कोयले का पर्याप्त भंडार मौजूद है. 1947 में आजादी के बाद यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है. बताया गया है कि पूरी सप्लाई चेन में विभिन्न लोकेशन्स पर लगभग 210 मिलियन टन के भंडार उपलब्ध हैं. सरकार का मानना है कि इस भंडार के दम पर विभिन्न सेक्टरों में ऊर्जा की जरूरतों को बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सकता है.
सूत्रों के अनुसार, मौजूदा कोयला स्टॉक सप्लाई चेन के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद है. सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियों के खदान स्थलों (पिटहेड) पर लगभग 127 मिलियन टन कोयला जमा है, जबकि कमर्शियल खदानों के पिटहेड पर करीब 15 मिलियन टन भंडार उपलब्ध है.
इसके अलावा बिजलीघरों में लगभग 54 मिलियन टन कोयला मौजूद है और करीब 14 मिलियन टन कोयला परिवहन की प्रक्रिया में है. अधिकारियों का कहना है कि इस बड़े भंडार से ऊर्जा उत्पादन और अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी.
हॉस्टलों और होटलों की रसोई के लिए विशेष व्यवस्था
ऊर्जा की कमी से प्रभावित कुछ क्षेत्रों को राहत देने के लिए सरकार ने खास निर्देश जारी किए हैं. कोयला मंत्रालय (Coal Ministry) को राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करने को कहा गया है ताकि सरकारी छात्रावासों में खाना पकाने और ईंधन की कमी से जूझ रहे होटल तथा रेस्तरां की रसोई के लिए कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.
अधिकारियों के मुताबिक, यदि अन्य उद्योगों को भी अतिरिक्त कोयले की जरूरत पड़ती है तो पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ समन्वय कर आवश्यक आवंटन किया जाएगा, ताकि किसी भी क्षेत्र में ऊर्जा की कमी न हो.
वैश्विक तनाव के बीच एहतियाती कदम
सरकार ने कोयला आपूर्ति से जुड़े कुछ मौजूदा नियमों में भी अस्थायी ढील देने का फैसला किया है. इसका उद्देश्य राज्यों और उद्योगों को ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना और मौजूदा चुनौतियों को कम करना है.
दरअसल, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है. इस टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर संभावित असर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है और देश की अर्थव्यवस्था तथा आवश्यक सेवाओं पर किसी भी संभावित असर को कम करने के लिए पहले से ही एहतियाती कदम उठा रही है.
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