वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा सप्लाई को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है. सरकार का कहना है कि देश के पास फिलहाल पर्याप्त कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का स्टॉक मौजूद है. अगर संकट लंबा खिंचता है तो रूस ने अतिरिक्त सप्लाई देने का भरोसा दिया है. साथ ही सरकार ने वैकल्पिक आयात स्रोत और कंटिजेंसी प्लान भी तैयार रखे हैं.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत के पास कई हफ्तों की घरेलू मांग को पूरा करने लायक कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स का स्टॉक है. जरूरत पड़ने पर स्ट्रैटेजिक रिजर्व और कमर्शियल इन्वेंट्री का इस्तेमाल किया जाएगा. रूस ने भी संकेत दिया है कि यदि वैश्विक सप्लाई प्रभावित होती है तो वह भारत को एडीशनल एनर्जी सप्लाई करने के लिए तैयार है.
कितने दिन का स्टॉक है भारत के पास
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि भारत के पास फिलहाल लगभग 25 दिन का कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है. हालांकि, कई रिपोर्ट्स में 50 दिन के रिजर्व का भी दावा किया जा रहा है. वहीं पेट्रोल, डीजल जैसे रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का भंडार 6 से 8 हफ्तों तक की खपत पूरी कर सकता है. साथ ही सरकार वैकल्पिक सोर्स की पहचान भी कर रही है, ताकि अगर वेस्ट एशिया का संकट 10 से 15 दिन से ज्यादा चलता है तो अतिरिक्त आयात तुरंत शुरू किया जा सके. इसमें क्रूड ऑयल, एलपीजी और एलएनजी के नए सप्लायर्स शामिल किए जा सकते हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार हालात पर रोजाना और घंटे दर घंटे नजर रख रही है और स्थिति से निपटने को लेकर आश्वस्त है.
कंटिजेंसी प्लान तैयार
सरकार ने सप्लाई में रुकावट की स्थिति में कई आपात कदम तय किए हैं. इनमें स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व का उपयोग, कमर्शियल इन्वेंट्री का इस्तेमाल और अलग अलग क्षेत्रों से सोर्सिंग बढ़ाना शामिल है. संभावित वैकल्पिक सप्लायर्स में अमेरिका, रूस, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देश शामिल हो सकते हैं. इससे वेस्ट एशिया से आने वाली सप्लाई में किसी भी कमी की भरपाई की जा सकेगी.
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि देश के पास शॉर्ट टर्म डिसरप्शन से निपटने के लिए पर्याप्त भंडार है. मंत्रालय ने 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जो देशभर में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई और स्टॉक की निगरानी कर रहा है.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर नजर
ऊर्जा मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने ऊर्जा सोर्स को काफी हद तक डायवर्सिफाई किया है. इससे हॉर्मूज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर निर्भरता कम हुई है. सरकार का कहना है कि भारतीय ऊर्जा कंपनियों के पास ऐसे सप्लाई विकल्प भी हैं जो इस समुद्री मार्ग से होकर नहीं गुजरते. अगर इस रूट पर अस्थायी रुकावट आती है तो वैकल्पिक कार्गो उपलब्ध रहेंगे.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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