Systematic Withdrawal Plan यानी SWP ऐसा तरीका है जिसमें म्यूचुअल फंड में निवेश बना रहता है और हर महीने तय रकम मिलती रहती है. रिटायरमेंट या नियमित आय की जरूरत वाले निवेशकों के लिए यह एक मजबूत विकल्प है. सही निकासी दर और सही फंड चुनने पर पैसा बढ़ता भी रह सकता है और लंबे समय तक स्थिर इनकम मिल सकती है.
मान लीजिए आपके पास म्यूचुअल फंड में 50 लाख रुपये हैं और आप हर महीने 40 हजार रुपये निकालना चाहते हैं. फंड हाउस हर महीने उतनी यूनिट्स बेचता है जितनी 40 हजार के बराबर हों और रकम सीधे आपके बैंक खाते में भेज देता है. बची हुई यूनिट्स निवेशित रहती हैं और अगर NAV बढ़ता है तो उनकी वैल्यू भी बढ़ती है. इस तरीके से निकासी जारी रहती है लेकिन पूरा कॉर्पस एक साथ खत्म नहीं होता. अगर फंड का रिटर्न निकासी दर से ज्यादा रहता है तो पैसा लंबे समय तक चलता है और कई मामलों में बढ़ भी सकता है.
SWP के फायदे
SWP का सबसे बड़ा फायदा नियमित आय है. रिटायरमेंट के बाद यह पेंशन जैसा अनुभव देता है. उदाहरण के तौर पर 50 लाख रुपये के निवेश पर 6 से 8 प्रतिशत सालाना रिटर्न मानें तो 30 से 40 हजार रुपये मासिक निकासी संभव हो सकती है. दूसरा फायदा कंपाउंडिंग का है. जो पैसा फंड में बचा रहता है वह बढ़ता रहता है. अगर बाजार अच्छा प्रदर्शन करे तो निकासी के बावजूद कॉर्पस मजबूत रह सकता है.
टैक्स के मामले में भी यह फायदेमंद है क्योंकि हर निकासी पर केवल कैपिटल गेन पर टैक्स लगता है, पूरी रकम पर नहीं. इक्विटी फंड में एक साल से ज्यादा होल्डिंग पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है और 1.25 लाख तक की छूट मिलती है. डेब्ट फंड में टैक्स आपके इनकम स्लैब के अनुसार लगता है.
रिस्क और सावधानियां
मार्केट रिस्क हमेशा बना रहता है. अगर आप 8 प्रतिशत की निकासी दर रखते हैं और फंड सिर्फ 6 प्रतिशत रिटर्न देता है तो धीरे धीरे मूल राशि घट सकती है. इसलिए कई एक्सपर्ट 4 से 6 प्रतिशत सालाना निकासी को संतुलित मानते हैं. महंगाई भी एक बड़ा फैक्टर है. अगर आप सालों तक एक ही फिक्स्ड रकम निकालते रहेंगे तो उसकी खरीदने की ताकत कम हो सकती है. इसलिए कुछ निवेशक हर साल निकासी रकम में 5 से 7 प्रतिशत बढ़ोतरी रखते हैं.
फंड का चयन भी महत्वपूर्ण है. इक्विटी फंड में रिटर्न की संभावना ज्यादा होती है लेकिन उतार चढ़ाव भी अधिक रहता है. हाइब्रिड या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड स्थिरता दे सकते हैं. साथ ही कुछ स्कीम में एक साल से पहले निकासी पर एग्जिट लोड भी लग सकता है.
कैसे शुरू करें
आप किसी भी म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म या एसेट मैनेजमेंट कंपनी की वेबसाइट पर जाकर SWP विकल्प चुन सकते हैं. अमाउंट, फ्रीक्वेंसी और शुरुआत की तारीख तय करें. KYC और बैंक डिटेल पूरी होना जरूरी है. आमतौर पर SWP शुरू करने के लिए अलग से कोई चार्ज नहीं लिया जाता.
एक नजर में उदाहरण
अगर 1 करोड़ रुपये का निवेश है और आप 6 प्रतिशत सालाना निकासी रखते हैं तो करीब 50 हजार रुपये हर महीने मिल सकते हैं. अगर फंड 10 से 12 प्रतिशत रिटर्न देता है तो 20 से 25 साल तक निकासी चल सकती है और कॉर्पस भी बढ़ सकता है. SWP उन लोगों के लिए मजबूत टूल है जो निवेश को जिंदा रखते हुए नियमित आय चाहते हैं. सही योजना, सही निकासी दर और संतुलित फंड चयन के साथ यह लंबी अवधि की वित्तीय स्थिरता दे सकता है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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