भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते में घरेलू कार बाजार को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि ₹25 लाख से कम कीमत वाली कारों पर कोई आयात शुल्क (Import Duty) नहीं घटेगा. छूट केवल महंगी और लग्जरी कारों के लिए एक तय कोटा के तहत दी जाएगी, जिससे मध्यम वर्ग की कारों पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा.
इस समझौते के तहत भारत ने यूरोपीय संघ की कंपनियों को एक निश्चित कोटा दिया है. सालाना कुल 2.5 लाख कारों तक ही यह रियायती आयात शुल्क लागू होगा. इसमें से 1.6 लाख कारें डीजल और पेट्रोल (ICE) वाली होंगी, जबकि 90,000 कारें इलेक्ट्रिक (EV) श्रेणी की होंगी. यह कोटा मुख्य रूप से उन यूरोपीय कंपनियों को मिलेगा जो अपनी पुरानी और मशहूर लग्जरी ब्रांड्स के लिए जानी जाती हैं. खास बात यह है कि ₹25 लाख से कम कीमत वाली कारों पर लगने वाले मौजूदा सीमा शुल्क, जीएसटी और रोड टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
तीन श्रेणियों में बंटा कोटा: महंगी कारों पर घटेगा टैक्स
सरकार ने आयात शुल्क की छूट को तीन अलग-अलग मूल्य श्रेणियों में बांटा है ताकि बाजार में संतुलन बना रहे. 15,000 यूरो (करीब ₹13.5 लाख CIF वैल्यू) से कम की कारों पर जीरो छूट है. वहीं, 15,000 से 35,000 यूरो की कारों पर पहले साल 35% आयात शुल्क लगेगा. इसके ऊपर की श्रेणी, यानी 35,000 यूरो से 50,000 यूरो और उससे महंगी कारों पर पहले साल ड्यूटी घटाकर 30% कर दी जाएगी. इन श्रेणियों के लिए सालाना करीब 33,000-34,000 वाहनों का कोटा निर्धारित किया गया है.
| कार श्रेणी (कीमत) | प्रथम वर्ष आयात शुल्क | वार्षिक कोटा (वाहनों की संख्या) |
| ₹25 लाख से कम | कोई छूट नहीं | लागू नहीं |
| ₹25 लाख से ₹32 लाख | 35% | 34,000 |
| ₹32 लाख से ₹45 लाख | 30% | 33,000 |
| ₹45 लाख से अधिक | 30% | 33,000 |
| इलेक्ट्रिक कारें (EV) | रियायती दर | 90,000 |
अधिकारियों का मानना है कि इस छूट का भारतीय बाजार पर बहुत कम असर पड़ेगा. वर्तमान में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा यात्री वाहन बाजार है जहाँ सालाना 43 लाख से अधिक कारें बिकती हैं. समझौते के तहत दिया गया रियायती कोटा भारतीय बाजार के कुल आकार का 2.5% से भी कम है. भारत ने मुख्य रूप से बड़ी इंजन क्षमता वाली कारों और महंगी इलेक्ट्रिक कारों के लिए ही रास्ता खोला है, जिससे मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कंपनियों की गाड़ियां कुछ सस्ती हो सकती हैं, लेकिन छोटी और मध्यम कारों के बाजार पर कोई आंच नहीं आएगी.
एक्सपोर्ट में भी फायदा
इस डील की सबसे अच्छी बात यह है कि यह एकतरफा नहीं है. अधिकारी ने बताया कि यूरोपीय संघ भारतीय कार निर्माताओं को वह कोटा देगा जो भारत द्वारा ईयू को दिए गए कोटा से 2.5 गुना अधिक होगा. इसका मतलब है कि भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए यूरोप के बाजार में अपनी गाड़ियां भेजने का रास्ता साफ हो गया है. चूंकि भारतीय कारें अपनी किफायती लागत और बढ़ती गुणवत्ता के लिए जानी जा रही हैं, इसलिए घरेलू कंपनियों को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनने में इस डील से बड़ी मदद मिलेगी.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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