भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ (EU) ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत पूरी कर ली है. यह दुनिया का सबसे बड़ा द्विपक्षीय समझौता है, जिससे भारत का निर्यात $75 बिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है. इस डील से कपड़े, जूते-चप्पल और मछली पालन जैसे क्षेत्रों को जबरदस्त फायदा होगा, वहीं यूरोपीय देशों को भारत में अपनी मशीनरी, वाइन और महंगी कारें बेचने का बेहतर मौका मिलेगा.
यह समझौता केवल टैक्स कम करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह रोजगार और छोटे उद्योगों (MSMEs) के लिए भी बड़ी उम्मीद लेकर आया है. जहां भारत के लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स जैसे टेक्सटाइल और लेदर को यूरोपीय बाजार में सीधी एंट्री मिलेगी, वहीं भारत भी यूरोपीय देशों से आने वाली हाई-टेक मशीनरी और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स पर अपनी ड्यूटी कम करेगा. इस समझौते को ‘बैलेंस्ड’ रखने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों जैसे खेती और छोटी कारों को कुछ सीमाओं के दायरे में रखा गया है.
इन भारतीय शहरों और सेक्टर्स की चमकेगी किस्मत
यूरोप का बाजार खुलने से भारत के कई मैन्युफैक्चरिंग हब को सीधा फायदा होगा:
- टेक्सटाइल और कपड़े: तिरुपुर, लुधियाना और सूरत जैसे शहरों से होने वाले एक्सपोर्ट पर ड्यूटी जीरो हो जाएगी. इससे यूरोप के $263 बिलियन के कपड़े के बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी.
- लेदर और फुटवियर: कानपुर, आगरा और वेल्लोर के क्लस्टर्स को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि 17% तक लगने वाला टैक्स अब खत्म हो जाएगा.
- रत्न, आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक्स: जयपुर, मुंबई और सूरत के ज्वेलरी व्यापार के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों पर भी ड्यूटी 14% से घटकर जीरो हो जाएगी.
- खेती और समुद्री उत्पाद: असम की चाय, केरल के मसाले और आंध्र प्रदेश-पश्चिम बंगाल के समुद्री उत्पादों को यूरोप के सुपरमार्केट्स में बेहतर जगह मिलेगी.
यूरोपीय सामान भी होंगे सस्ते
भारत ने यूरोपीय संघ के 92% से ज्यादा सामानों पर रियायतें दी हैं:
- मशीनरी और केमिकल्स: यूरोप से आने वाली मशीनरी और दवाइयों पर ड्यूटी (जो अभी 11% से 44% तक है) काफी कम की जाएगी.
- फल और प्रोसेस्ड फूड: यूरोप के सेब, कीवी और चॉकलेट अब भारतीय बाजारों में सस्ती कीमतों पर उपलब्ध हो सकते हैं.
- वाइन और स्पिरिट्स: फ्रांस, इटली और स्पेन की वाइन और शराब पर कोटा सिस्टम के तहत टैक्स कम किया जाएगा.
कारें, स्टील और पर्यावरण के कड़े नियम
- महंगी कारों का कोटा: 15,000 यूरो से कम कीमत वाली यूरोपीय कारों को इस डील से बाहर रखा गया है ताकि घरेलू कंपनियों को नुकसान न हो. महंगी कारों पर ड्यूटी 5 साल में घटाकर 10% की जाएगी. अच्छी बात यह है कि भारत को यूरोप में कार निर्यात करने के लिए ढाई गुना ज्यादा कोटा मिला है.
- कार्बन टैक्स (CBAM): भारत को यूरोप के नए कार्बन बॉर्डर टैक्स से कोई खास छूट नहीं मिली है, लेकिन भारतीय कंपनियों को पर्यावरण नियमों को पूरा करने के लिए तकनीकी मदद जरूर दी जाएगी.
- पढ़ाई और नौकरियां: भारतीय छात्रों के लिए यूरोप में पढ़ाई और प्रोफेशनल सर्विसेज के 144 सेक्टर्स में काम करने के रास्ते आसान होंगे.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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