भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगा दी है, जिसे पीएम मोदी ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा है. इस समझौते से भारत के कपड़ा और समुद्री उत्पाद क्षेत्रों को जबरदस्त फायदा मिलने की उम्मीद है क्योंकि वहां टैक्स जीरो हो जाएगा. हालांकि, विदेशी कारों और शराब पर इंपोर्ट ड्यूटी घटने से भारतीय ऑटोमोबाइल और लिकर कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई है.
हालांकि, यह समझौता भारतीय बाजार के लिए कड़ी चुनौती भी लेकर आया है. जहां एक तरफ भारतीय माल यूरोप में बिना किसी टैक्स के बिकेगा, वहीं दूसरी तरफ भारत को भी यूरोपीय कारों और मशीनों पर लगने वाली भारी-भरकम ड्यूटी कम करनी होगी. बाजार के जानकारों का मानना है कि इस डील ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में कौन से सेक्टर तरक्की करेंगे और किन कंपनियों को विदेशी होड़ का सामना करना पड़ेगा.
किसे होगा सबसे ज्यादा मुनाफा?
यूरोपीय संघ भारत के 90% सामानों पर टैक्स पूरी तरह खत्म कर देगा. इसका सबसे बड़ा फायदा इन सेक्टर्स को मिलेगा:
- टेक्सटाइल और कपड़े: भारतीय कपड़ों पर अभी तक करीब 12% टैक्स लगता था, जो अब जीरो हो जाएगा. इससे किटेक्स गारमेंट्स और गो फैशन जैसे शेयरों में तेजी आई है.
- सी-फूड और समुद्री उत्पाद: झींगा (shrimp) मछली के निर्यातकों के लिए 26% तक की ड्यूटी खत्म होगी, जिससे एपेक्स फ्रोजन फूड्स जैसे शेयर बढ़ रहे हैं.
- फार्मा और केमिकल्स: दवाओं और रसायनों के लिए यूरोप का बाजार खुलना डॉ. रेड्डीज और सन फार्मा जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए बड़ी खबर है.
विदेशी कारों और शराब का रास्ता हुआ साफ
यूरोपीय संघ की मांग को मानते हुए भारत ने अपनी इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ी कटौती की है:
कारों पर छूट: भारत विदेशी कारों पर लगने वाली 110% की ड्यूटी को घटाकर 10% तक लाएगा. हालांकि इसके लिए हर साल 2.5 लाख कारों का कोटा तय किया गया है. इसका फायदा लग्जरी कार बनाने वाली कंपनियों जैसे BMW और मर्सिडीज को मिलेगा.
वाइन और स्पिरिट्स: विदेशी वाइन पर लगने वाला 150% टैक्स घटकर शुरुआती तौर पर 75% और बाद में 20% तक रह जाएगा. इससे भारतीय शराब कंपनियों जैसे सुला वाइनयार्ड्स के शेयरों पर दबाव दिखा है.
एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वी के विजयकुमार का मानना है कि यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगा, लेकिन इसका पूरा असर 2027 की शुरुआत से ही दिखाई देगा. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस डील से 2031 तक भारत का निर्यात $50 बिलियन तक बढ़ सकता है. हालांकि, भारतीय कंपनियों को अब अपनी क्वालिटी और तकनीक पर ज्यादा ध्यान देना होगा ताकि वे यूरोपीय प्रोडक्ट से मुकाबला कर सकें.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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