वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने विश्वास जताते हुए कहा कि उन्होंने अब तक विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ सात महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते किए हैं, लेकिन यूरोपीय संघ के साथ होने वाला यह समझौता उन सभी में सबसे प्रभावशाली और व्यापक होगा. गोयल के अनुसार, यह डील भारत के लिए मील का पत्थर साबित होगी क्योंकि इसमें शामिल क्षेत्र भारत के राष्ट्रीय हितों के पूरी तरह अनुकूल हैं.
भारत-ईयू नहीं है प्रतिस्पर्धी
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत और यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं, बल्कि एक-दूसरे की पूरक हैं. जहां भारत के पास विशाल मानव संसाधन और विनिर्माण क्षमता है, वहीं EU के पास उच्च तकनीक और निवेश की अपार संभावनाएं हैं. इस समझौते की बातचीत अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है. उम्मीद जताई जा रही है कि 27 जनवरी को इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है.
यूरोपीय परिषद के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे. वे भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे. यह यात्रा दोनों क्षेत्रों के बीच प्रगाढ़ होते रक्षा और आर्थिक संबंधों का प्रतीक है.
भारत में निर्यात में 17% है ईयू की हिस्सेदारी
यूरोपीय संघ में फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्वीडन और नीदरलैंड जैसे 27 आर्थिक रूप से संपन्न देश शामिल हैं. भारत के कुल निर्यात में अकेले यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है. आंकड़ों पर नजर डालें तो:-
- द्विपक्षीय व्यापार (वित्त वर्ष 2024-25): 136.53 अरब अमेरिकी डॉलर.
- भारत का निर्यात: 75.85 अरब डॉलर.
- भारत का आयात: 60.68 अरब डॉलर.
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि दोनों पक्षों के बीच व्यापार काफी संतुलित है, जो एक स्थायी व्यापार समझौते के लिए बहुत जरूरी होता है.
क्या हैं चुनौतियां?
इतनी बड़ी डील में कुछ चुनौतियां होना स्वाभाविक है. पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में यूरोपीय संघ के ‘कार्बन टैक्स’ (CBAM) जैसे कुछ तकनीकी और पर्यावरणीय मुद्दों पर बातचीत जारी है. हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा. अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के सवाल पर उन्होंने कहा कि सही समय आने पर वह भी होगा, लेकिन फिलहाल पूरा ध्यान EU के साथ इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर है.
भारत-ईयू एफटीए से किन सेक्टरों को ज्यादा फायदा?
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाले इस ऐतिहासिक ‘FTA’ से भारत के कई प्रमुख सेक्टरों की किस्मत चमकने वाली है. जिन प्रमुख उद्योगों को सबसे ज्यादा लाभ होगा उनमें शामिल हैं-
टेक्सटाइल और अपैरल : वर्तमान में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों को EU के बाजारों में ‘ड्यूटी-फ्री’ एक्सेस मिलता है, जबकि भारतीय निर्यातकों को 9% से 12% तक का आयात शुल्क देना पड़ता है. FTA के बाद यह शुल्क जीरो हो जाएगा, जिससे भारतीय कपड़े वैश्विक बाजार में सस्ते और प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे.
आईटी और डिजिटल सेवाएं (IT Services) : भारत दुनिया का आईटी हब है. इस समझौते के तहत ‘मोड-4’ (Mode-4) सेवाओं पर चर्चा चल रही है, जो पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाती है. भारतीय आईटी इंजीनियरों और डेटा वैज्ञानिकों के लिए यूरोपीय देशों का वीजा और वर्क परमिट मिलना आसान हो जाएगा.
रत्न और आभूषण (Gems and Jewellery) : यूरोप के अमीर देशों (जैसे फ्रांस और इटली) में भारतीय हस्तशिल्प और तराशे गए हीरों की भारी मांग है. आयात शुल्क कम होने से भारतीय आभूषणों की मांग वहां के लक्जरी स्टोर्स में बढ़ेगी. विशेष रूप से ‘लैब-ग्रोन डायमंड्स’ (LGD) के लिए यह एक बहुत बड़ा बाजार साबित होगा.
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण (Agri-products) : भारत से बासमती चावल, समुद्री उत्पाद (सीफूड), फल और मसालों का निर्यात बड़े पैमाने पर EU को किया जाता है. वर्तमान में कड़े ‘फाइटोसेनेटरी’ (स्वच्छता मानक) नियमों के कारण कई खेप वापस आ जाती हैं. इस डील के तहत मानकों में तालमेल बैठने से भारतीय किसानों के उत्पाद आसानी से यूरोपीय सुपरमार्केट तक पहुंच सकेंगे.
(पीटीआई इनपुट के साथ)
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