यूरोपीय संघ के 27 देश अल्कोहल उत्पादन में दुनिया के सिरमौर माने जाते हैं. भारत के शहरी मध्यम वर्ग में यूरोपीय ब्रांड्स खूब लोकप्रिय हैं लेकिन ज्यादा कीमत की वजह से इनकी मांग सीमित है. भारत में नीदरलैंड्स की Heineken, बेल्जियम की Stella Artois और Leffe, जर्मनी की Warsteiner, डेनमार्क की Carlsberg और आयरलैंड की Guinness बीयर बहुत मशहूर है. 2023-24 में भारत ने ईयू से 64.9 मिलियन डॉलर की स्पिरिट्स आयात की थी, जिसके अब कई गुना बढ़ने की उम्मीद है.
इन वाइन ब्रांड्स के भी दीवाने हैं भारतीय
फ्रांस की मशहूर शैम्पेन Moët & Chandon, इटली की Prosecco, स्पेन की Rioja और स्वीडन की मशहूर वोडका Absolut जैसी प्रीमियम ड्रिंक्स भी भारत में बिकती हैं. लेकिन ज्यादा आयात शुल्क के कारण ये बहुत महंगी हैं. इस वजह से इनका स्वाद आम आदमी नहीं चख पाता.
कितनी कम होगी कीमत?
कीमतों पर होने वाले असर को एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए एक Heineken बीयर (750 ML) की फैक्ट्री कीमत लगभग 850 रुपये है. 110% टैरिफ के साथ इसकी लैंडेड कॉस्ट 1,785 रुपये पड़ती थी, जो रिटेल स्टोर तक पहुंचते-पहुंचते 3,000 रुपये तक जा सकती थी. अब 50% टैरिफ के साथ इसकी लैंडेड कॉस्ट घटकर 1,275 रुपये रह जाएगी, जिससे रिटेल कीमत 2,000 रुपये के आसपास आ सकती है.
इसी तरह, 4,000 रुपये से अधिक में मिलने वाली Absolut वोडका की बोतल अब 2,500 से 3,000 रुपये के दायरे में मिल सकती है. मध्यम रेंज की फ्रेंच वाइन, जो पहले 2,000 रुपये की थी, अब महज 1,200 रुपये में उपलब्ध हो सकती है. हालांकि, अंतिम कीमत राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स और अन्य स्थानीय करों पर भी निर्भर करेगी.
घरेलू ब्रांड्स को मिलेगी चुनौती
आयातित शराब सस्ती होने से न केवल उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे, बल्कि भारत के पर्यटन औंर हॉस्पिटैलिटी (होटल और रेस्टोरेंट) क्षेत्र को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा. प्रीमियम वाइन की उपलब्धता अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को अधिक आकर्षित करेगी. विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2032 तक अल्कोहल का आयात दोगुना हो सकता है, जिससे यूरोपीय निर्यातकों के लिए 3 से 5 बिलियन यूरो का विशाल बाजार खुलेगा. दूसरी ओर, यह समझौता घरेलू ब्रांड्स जैसे किंगफिशर या स्थानीय स्पिरिट्स निर्माताओं के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा पैदा करेगा. भारतीय कंपनियों को अब गुणवत्ता और कीमत के मामले में वैश्विक दिग्गजों का मुकाबला करना होगा.
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