हालांकि, अंतिम रिटेल कीमत पर राज्य-स्तरीय वैट, जीएसटी (आमतौर पर 5-18%) और डिस्ट्रीबुशन कॉस्ट का असर रहेगा, इसलिए पूरी टैरिफ कटौती सीधे कीमत में नहीं दिखेगी. अनुमान है कि कीमतों में 20-35% तक की कमी आएगी, जो ब्रांड, पैकेजिंग और बाजार की गतिशीलता पर निर्भर करेगी.
ऑलिव ऑयल की क्या होगी कीमत?
ईयू दुनिया का सबसे बड़ा ऑलिव ऑयल उत्पादक है, जहां स्पेन, इटली और ग्रीस मुख्य एक्सपोर्ट हैं. भारत में आयातित ऑलिव ऑयल मुख्य रूप से इन्हीं देशों से आता है, और FTA से पहले 45% बेसिक ड्यूटी प्लस 5% इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स (IGST) लगता था, जो कुल मिलाकर 50% से अधिक हो जाता था. अब टैरिफ शून्य होने से आयात लागत में सीधी कमी आएगी, जिससे खुदरा कीमतें सस्ती होंगी.
भारतीय बाजार में ऑलिव ऑयल की मांग स्वास्थ्य जागरूकता के कारण बढ़ रही है, लेकिन ऊंची कीमतें बाधा थीं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव उपभोक्ताओं को प्रीमियम ऑलिव ऑयल (जैसे एक्स्ट्रा वर्जिन) को अधिक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा. टॉप ईयू ब्रांड्स और अनुमानित कीमत प्रभाव (1 लीटर एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल के आधार पर, दिल्ली/मुंबई बाजार में औसत रिटेल कीमतें)-
| ब्रांड | मूल देश (ईयू) | पहले की ऐवरेज कीमत (रुपये) | अनुमानित नई कीमत (रुपये) | कमी का प्रतिशत (अनुमान) |
| Bertolli | इटली | 900-1,200 | 650-900 | 25-30% |
| Borges | स्पेन | 800-1,000 | 600-750 | 25-30% |
| Colavita | इटली | 1,000-1,300 | 700-950 | 25-30% |
| Figaro | स्पेन | 700-900 | 500-650 | 25-30% |
| Pompeian | स्पेन और इटली | 850-1,100 | 600-800 | 25-30% |
ये अनुमान टैरिफ कटौती पर आधारित हैं, जहां लैंडेड कॉस्ट (आयात के बाद की लागत) में 30-40% कमी आएगी. उदाहरण के लिए, Bertolli की फैक्टरी कीमत लगभग 500 रुपये मानें, तो पहले टैरिफ से यह दोगुनी हो जाती थी; अब यह 20-25% सस्ती होगी. हालांकि, जीएसटी और मार्जिन के कारण पूरी कमी नहीं दिखेगी.
वेजिटेबल ऑयल कितना सस्ता हुआ?
वेजिटेबल ऑयल में मुख्य रूप से सनफ्लावर ऑयल, रेपसीड (कैनोला) ऑयल और अन्य प्लांट-बेस्ड ऑयल शामिल हैं. ईयू से इनका आयात सीमित है क्योंकि भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया और यूक्रेन से पाम और सनफ्लावर ऑयल आयात करता है. लेकिन FTA ईयू उत्पादों को बढ़ावा देगा, जहां स्पेन, फ्रांस और नीदरलैंड्स जैसे देश सनफ्लावर और रेपसीड ऑयल के प्रमुख उत्पादक हैं. पहले इन पर 40-45% टैरिफ था (क्रूड एडिबल ऑयल पर हाल ही में कम किया गया था, लेकिन FTA से पूरी तरह खत्म).
टॉप ईयू ब्रांड्स और अनुमानित कीमत प्रभाव (1 लीटर सनफ्लावर/कैनोला ऑयल के आधार पर):
| ब्रांड | मूल देश (ईयू) | टाइप | पहले की ऐवरेज कीमत (रुपये) | अनुमानित नई कीमत (रुपये) | कमी का प्रतिशत (अनुमान) |
| Bunge (various labels) | फ्रांस/स्पेन | रेपसीड/कैनोला | 180-200 | 130-170 | 20-25% |
| Cargill (Gemini/Sunpure) | नीदरलैंड्स/स्पेन | सनफ्लावर | 150-220 | 110-150 | 20-25% |
| Lesieur | फ्रांस | सनफ्लावर | 200-250 | 150-190 | 20-25% |
| KTC | यूके (ईयू पूर्व) लेकिन ईयू सप्लाई | वेजिटेबल ब्लेंड | 160-200 | 120-150 | 20-25% |
| Flora (Unilever) | नीदरलैंड्स | सनफ्लावर | 170-210 | 130-160 | 20-25% |
ये ब्रांड मुख्य रूप से ईयू उत्पादन पर आधारित हैं, हालांकि कुछ ग्लोबल हैं. अनुमानित कमी कम है क्योंकि वेजिटेबल ऑयल का बाजार पहले से ही प्रतिस्पर्धी है, और टैरिफ कटौती का असर 20-25% तक सीमित रहेगा.
यह FTA ईयू से आयात को बढ़ावा देगा, जिससे भारतीय बाजार में अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे और कीमतें कम होंगी. अनुमान है कि ऑलिव ऑयल आयात 20-30% बढ़ सकता है, जबकि वेजिटेबल ऑयल में ईयू का हिस्सा बढ़ेगा. हालांकि, उपभोक्ताओं को सलाह है कि कीमतें तुरंत नहीं गिरेंगी क्योंकि स्टॉक और वितरण चेन का असर रहेगा. घरेलू ब्रांड्स जैसे Fortune या Saffola पर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, लेकिन कुल मिलाकर यह स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों को प्रोत्साहित करेगा. यदि आप किसी विशिष्ट ब्रांड या शहर की कीमतों के बारे में अधिक जानना चाहें, तो और डिटेल्स प्रदान करें.
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