India-EU Trade Deal : भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ट्रेड डील में एक खास प्रावधान रखा गया है कि यूरोप अगर किसी भी देश को कार्बन टैक्स से छूट देता है तो यह भारत पर भी अपने आप लागू हो जाएगा.
आज की डील के लिहाज से देखें तो यूरोपीय संघ (ईयू) ने व्यापार समझौते में भारत को अपने कार्बन नियमों पर कोई सीधी रियायत नहीं दी है. हालांकि, वह इस बात पर सहमत हो गया है कि 27 देशों के इस समूह द्वारा सीबाम प्रावधानों के तहत किसी भी दूसरे देश को दी जाने वाली कोई भी ढील अपने आप भारतीय निर्यातकों को भी मिल जाएगी. मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अधिकारों के ‘पुनर्संतुलन’ का प्रावधान भी करता है. यह तब लागू होगा जब इस नियम के तहत ईयू के कदम भारतीय कंपनियों को मिलने वाले समझौते के लाभों को नुकसान पहुंचाते हैं.
क्या होता है सीबीएएम
कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबीएएम) या कार्बन कर एक जनवरी से प्रभावी हुआ है. यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते के बीच सबसे विवादित मुद्दों में से एक था. इस व्यवस्था के तहत ईयू इस्पात, एल्युमीनियम, उर्वरक और सीमेंट जैसी वस्तुओं पर कार्बन कर लगाएगा, क्योंकि इनके निर्माण के दौरान एक निर्धारित सीमा से अधिक कार्बन उत्सर्जन होता है. वर्तमान में, यह कर इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों पर लागू है.
किसी को भी नहीं मिलती छूट
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि सीबीएएम एक कठिन मुद्दा है. इसमें किसी के लिए भी कोई लचीलापन नहीं है. हालांकि, एक प्रतिबद्धता है कि भविष्य में किसी भी अन्य देश को दी जाने वाली कोई भी ढील भारत को भी दी जाएगी. हमने उन्हें इसके लिए राजी किया है. अधिकारी ने बताया कि समझौते के अनुसार, भविष्य में सीबाम नियमों के तहत ईयू किसी भी देश को जो भी रियायत देगा, वह अपने आप ही भारत को मिल जाएगी.
भारत कम करेगा कार्बन उत्सर्जन
दोनों पक्ष कार्बन कीमतों और सत्यापनकर्ताओं की मान्यता पर तकनीकी सहयोग बढ़ाने के साथ ही ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और उभरती कार्बन आवश्यकताओं के अनुपालन के लिए वित्तीय सहायता और लक्षित समर्थन पर भी सहमत हुए हैं. अधिकारी ने बताया कि हमने उन्हें प्रेरित किया है कि हम आपके साथ बातचीत के लिए दोबारा नहीं आना चाहते. यदि आप किसी को कोई ढील देते हैं, तो कृपया वह हमें भी दें. इसलिए यह एफटीए का हिस्सा है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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