घरेलू बाजार में सोने पर प्रीमियम उछलकर $112 प्रति औंस पर पहुंच गया है, जो 2014 के बाद सबसे अधिक है. रुपये में रिकॉर्ड गिरावट (₹91.74 प्रति डॉलर) के कारण यह अटकलें तेज हैं कि सरकार आगामी बजट में सोने और चांदी के आयात पर फिर से ड्यूटी बढ़ा सकती है. इसी आशंका में व्यापारियों ने कीमतों पर भारी प्रीमियम वसूलना शुरू कर दिया है.
इस भारी उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह रुपये की कमजोरी और 1 फरवरी को पेश होने वाला ‘आम बजट 2026’ है. बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 91.74 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गया. व्यापारियों को डर है कि बढ़ते व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम करने और रुपये को संभालने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट में सोने-चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) फिर से बढ़ा सकती हैं.
कीमतों ने बनाया नया इतिहास
बाजार में आई इस घबराहट के बीच सोने और चांदी की कीमतों ने घरेलू स्तर पर अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं.
- स्थानीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1,58,339 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई.
- चांदी की कीमतें भी ₹3,35,521 प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर को छू गईं.
- कैप्सगोल्ड के एमडी चंदा वेंकटेश के अनुसार, “बजट में ड्यूटी बढ़ने की आशंका के चलते व्यापारी रिकॉर्ड कीमतों के ऊपर भी भारी प्रीमियम वसूल रहे हैं.”
क्यों बढ़ रहा है सरकार पर दबाव?
भारत दुनिया में सोने का दूसरा और चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है. जुलाई 2024 में सरकार ने तस्करी रोकने के लिए आयात शुल्क 15% से घटाकर 6% कर दिया था. लेकिन हाल के महीनों में आयात में भारी उछाल आया है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हो रहा है और रुपये पर दबाव बढ़ रहा है. सरकार इस आयात को नियंत्रित करने के लिए बैंकों द्वारा ज्वेलर्स को दी जाने वाली फंडिंग पर भी रोक लगाने जैसे कड़े कदम उठा सकती है.
शॉर्ट सेलिंग और डिमांड का गणित
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, कीमतों में अचानक आई तेजी ने उन व्यापारियों को संकट में डाल दिया जिन्होंने ‘शॉर्ट पोजीशन’ (कीमत गिरने की उम्मीद में सौदा) ले रखी थी. उन्हें अपने सौदे काटने के लिए ऊंचे दामों पर खरीदारी करनी पड़ी, जिससे कीमतों को और हवा मिली. दिलचस्प बात यह है कि जहां गहनों (Jewellery) की मांग फिलहाल कम है, वहीं सिक्कों, बार और ईटीएफ (ETF) में निवेश की मांग में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है.
सप्लाई की कमी ने बिगाड़ा खेल
अमरापाली ग्रुप गुजरात के सीईओ चिराग ठक्कर का कहना है कि बाजार में सप्लाई मांग के मुकाबले काफी कम है. सप्लाई की इस किल्लत ने विक्रेताओं को प्रीमियम वसूलने का मौका दे दिया है. ज्वेलरी इंडस्ट्री को डर है कि अगर सरकार ने गोल्ड मेटल लोन या बैंक फंडिंग पर प्रतिबंध लगाया, तो बाजार में नकदी और स्टॉक का संकट और गहरा सकता है. फिलहाल वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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