New Vehicle Rule : सरकार ने महिंद्रा और टाटा की शिकायत करने के बाद उस ड्राफ्ट को रद्द कर दिया है, जिसमें छोटी कारें बनाने वाी कंपनियों को छूट देने की बात कही गई थी. इस छूट का फायदा सिर्फ छोटी कार बनाने वाली कंपनी को मिलना था, जिस सेग्मेंट में 95 फीसदी हिस्सेदारी मारुति की है. जाहिर है कि इसका फायदा मारुति को मिलना था, लेकिन टाटा और महिंद्रा की शिकायत करने के बाद सरकार ने इस छूट को रद्द करने का फैसला किया है.
टाटा और महिंद्रा की शिकायत पर सरकार ने ईंधन पर छूट खत्म कर दी है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर ने बताया है कि अब भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने उस छूट को हटा दिया है और अन्य मानकों को भी सख्त कर दिया है. इससे सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों पर इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की बिक्री बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा. नए नियम वाहन के वजन के लिए अतिरिक्त छूट को सीमित करते हैं. हल्के और भारी वाहन निर्माताओं के बीच बराबरी लाने का प्रयास करते हैं और असली दुनिया में ईंधन दक्षता बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं.
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मॉडल को बढ़ावा
ऊर्जा मंत्रालय ने कहा है कि नए ड्राफ्ट से इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मॉडल को बढ़ावा मिलेगा. भारत में परिवहन की कुल ऊर्जा खपत का लगभग 12% हिस्सा है और पेट्रोलियम आयात व कार्बन उत्सर्जन का बड़ा कारण है. दस्तावेज के अनुसार, यात्री वाहन परिवहन से जुड़े कुल उत्सर्जन का लगभग 90% हिस्सा बनाते हैं. कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी मानक एक निर्माता के 3,500 किलोग्राम (7,716 पाउंड) से कम वजन वाले यात्री वाहनों के बेड़े में अनुमत CO2 उत्सर्जन तय करते हैं. ये हर पांच साल में अपडेट होते हैं और ऑटो कंपनियों को इलेक्ट्रिफिकेशन, सीएनजी और फ्लेक्स-फ्यूल जैसी स्वच्छ तकनीकों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं.
कब से लागू होंगे नए नियम
नए नियम अप्रैल 2027 से 5 साल के लिए लागू होंगे और ऑटो कंपनियों के उत्पाद और पावरट्रेन निवेश योजनाओं के लिए अहम हैं. यह स्पष्ट नहीं है कि नियम कब अंतिम रूप दिए जाएंगे. सितंबर के ड्राफ्ट में वाहन के वजन के साथ फ्यूल-कंजम्पशन टारगेट्स को तेजी से बढ़ाने की अनुमति थी, जिससे महिंद्रा, टाटा और वॉक्सवैगन जैसी भारी कार बनाने वाली कंपनियों के लिए अनुपालन आसान हो जाता है, जबकि मारुति जैसी हल्की कार बनाने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ता. इसी असंतुलन के कारण छूट का प्रस्ताव आया था. संशोधित योजना में भारी वाहनों को मिलने वाली छूट को कम कर दिया गया है.
बड़ी कार बनाने वाली कंपनियों पर बोझ
डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि बड़ी कारें बनाने वाली कंपनियों को अब अधिक मजबूत आंतरिक दक्षता सुधार हासिल करनी होगी. एक क्रेडिट सिस्टम उन कंपनियों को इनाम देगा जो ज्यादा इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहन बेचेंगी और कंपनियों के बीच फ्यूल-कंजम्पशन प्रदर्शन को साझा करने की अनुमति होगी. नियमों का पालन न करने पर प्रति कार 550 डॉलर तक का जुर्माना लगाया जाएगा. संशोधित योजना का लक्ष्य मार्च, 2032 तक 5 सालों में औसत बेड़े के उत्सर्जन को 114 ग्राम/किमी से घटाकर लगभग 100 ग्राम/किमी करना है. अगर 2032 तक कुल कार बिक्री में इलेक्ट्रिक मॉडल 11% तक पहुंचते हैं, तो यह 76 ग्राम/किमी तक भी गिर सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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