जनवरी में भारत रूस से क्रूड ऑयल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बना रहा. करीब 2.59 अरब डॉलर के आयात के साथ रूस भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा स्रोत बना हुआ है. हालांकि दिसंबर के मुकाबले कुल खरीद में हल्की गिरावट दर्ज की गई है. वैश्विक प्रतिबंधों और बदलते समीकरणों के बीच आगे आयात में कमी के संकेत मिल रहे हैं.
जनवरी में रूस से 2.59 अरब डॉलर की खरीद, भारत फिर बना दूसरा सबसे बड़ा खरीदार. (Image:AI)
कच्चे तेल की सबसे बड़ी हिस्सेदारी, कोयला दूसरे नंबर पर
कुल आयात में सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का रहा. जनवरी में भारत ने करीब 2 अरब यूरो का रूसी क्रूड खरीदा, जो कुल खरीद का लगभग 78 प्रतिशत था. इसके बाद 442 मिलियन यूरो का कोयला और 30 मिलियन यूरो के पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए गए. दिसंबर में कच्चे तेल की खरीद 1.8 अरब यूरो रही थी, यानी जनवरी में क्रूड आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई. इससे साफ है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी कच्चा तेल अभी भी अहम भूमिका निभा रहा है.
चीन ने बढ़ाई रफ्तार, यूराल्स क्रूड की रिकॉर्ड खरीद
जहां भारत की खरीद में हल्की गिरावट देखी गई, वहीं चीन ने रूस से तेल आयात में तेज बढ़ोतरी की. पिछले दो महीनों में चीन ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में 29 प्रतिशत इजाफा किया. खास तौर पर यूराल्स ग्रेड क्रूड की मांग में बड़ा उछाल आया. जनवरी में चीन का कुल रूसी तेल आयात 4 अरब यूरो तक पहुंच गया, जो उसके कुल आयात का 16 प्रतिशत रहा. CREA के अनुसार, पहले कम पसंद किए जाने वाले यूराल्स ग्रेड की खरीद जनवरी 2026 में दोगुनी हो गई और यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है.
जामनगर रिफाइनरी पर प्रतिबंधों का असर
जनवरी में रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्वामित्व वाली जामनगर रिफाइनरी को समुद्री मार्ग से रूसी तेल की कोई खेप नहीं मिली. इसके पीछे अमेरिका के Office of Foreign Assets Control (OFAC) द्वारा रूस की कंपनी Rosneft पर लगाए गए प्रतिबंध बताए जा रहे हैं, जो इस रिफाइनरी की मुख्य सप्लायर थी. हालांकि फरवरी में हालात बदले और 18 फरवरी तक रूस से तीन शिपमेंट जामनगर के लिए रवाना होने की जानकारी सामने आई.
आगे घट सकता है आयात, सऊदी अरब की वापसी के संकेत
जनवरी में रूस के यूराल्स क्रूड की औसत कीमत 4 प्रतिशत बढ़कर 54.2 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो यूरोपीय संघ और ब्रिटेन द्वारा तय नई 44.1 डॉलर की प्राइस कैप से ऊपर रही. इस बीच यूरोपीय संघ ने 21 जनवरी 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू कर दिया. साथ ही OFAC के प्रतिबंधों ने भारतीय रिफाइनरियों पर दबाव बढ़ाया है. डेटा फर्म Kpler के मुताबिक मार्च में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 8 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है, जो मई 2022 के बाद सबसे कम होगा. जनवरी में भारत ने 12 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल और 7.74 लाख बैरल प्रतिदिन सऊदी अरब से आयात किया था, जिससे संकेत मिलते हैं कि सऊदी अरब फिर से भारत के तेल आयात बास्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है.
About the Author
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.