यह लॉन्च इंडिया एआई मिशन के तहत किया गया है, जिसे मार्च 2024 में केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी. इस मिशन का मकसद भारत के लिए अपना एआई सिस्टम बनाना, बड़े स्तर पर कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और आम लोगों के लिए एआई एप्लिकेशन तैयार करना है. सरकार ने इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट रखा है.
इंडिया एआई मिशन क्या है और क्यों जरूरी है
इंडिया एआई मिशन का मकसद भारत को एआई में आत्मनिर्भर बनाना है. अभी दुनिया में ज्यादातर एआई सिस्टम बड़ी टेक कंपनियों जैसे गूगल, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट के कंट्रोल में हैं. इससे डेटा सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी कंट्रोल का खतरा रहता है.
इस मिशन के तहत सरकार भारत में ही बड़े एआई मॉडल बनाने, सुपरकंप्यूटर और जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और सरकारी सेवाओं में एआई इस्तेमाल करने पर काम कर रही है. 2024 के बाद सरकार ने जीपीयू सब्सिडी शुरू की और स्टार्टअप्स को कंप्यूट सपोर्ट के लिए आवेदन करने को कहा. अब तक 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी दी जा चुकी है और कई कंपनियों को चुना गया है.
सरवम एआई के दो बड़े लैंग्वेज मॉडल
बेंगलुरु की कंपनी सरवम एआई ने दो बड़े लैंग्वेज मॉडल लॉन्च किए हैं. एक मॉडल में 30 बिलियन पैरामीटर हैं और दूसरा मॉडल 105 बिलियन पैरामीटर वाला है. आसान भाषा में समझें तो पैरामीटर का मतलब मॉडल की समझने और जवाब देने की क्षमता से होता है. जितने ज्यादा पैरामीटर, उतनी ज्यादा समझ. सरवम का दावा है कि उसका बड़ा मॉडल कुछ टेस्ट में डीपसीक और गूगल जेमिनी जैसे ग्लोबल सिस्टम से बेहतर प्रदर्शन करता है. कंपनी ने इसमें मिक्सचर ऑफ एक्सपर्ट्स टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है, जिससे एआई चलाने की लागत कम होती है.
ये मॉडल कोडिंग, जटिल सवालों के जवाब, और एजेंटिक एआई जैसे कामों के लिए बनाए गए हैं. सरवम का कहना है कि भारत जैसे बड़े देश में एआई को सस्ते में इस्तेमाल करने के लिए एफिशिएंसी सबसे जरूरी है. सरवम के को फाउंडर विवेक राघवन ने कहा कि एआई में सबसे बड़ा मुद्दा सबसे बड़ा मॉडल बनाना नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी पर देश का कंट्रोल होना है.
ज्ञानि एआई का वाचना टेक्स्ट टू स्पीच मॉडल
ज्ञानि एआई ने वाचना नाम का टेक्स्ट टू स्पीच मॉडल लॉन्च किया है. यह मॉडल सिर्फ 10 सेकंड की आवाज सुनकर किसी इंसान की आवाज क्लोन कर सकता है और 12 भारतीय भाषाओं में बोल सकता है. यह मॉडल आवाज का टोन, पिच और बोलने का स्टाइल भी कॉपी करता है. इसका मतलब है कि एक ही आवाज अलग अलग भाषाओं में बोल सकती है. यह तकनीक सरकारी सेवाओं, कस्टमर सपोर्ट और बड़े बिजनेस सिस्टम में इस्तेमाल की जाएगी. खास बात यह है कि यह मॉडल कम इंटरनेट स्पीड में भी काम कर सकता है और इसका डेटा भारत के अंदर ही रखा जाएगा, जिससे डेटा सिक्योरिटी मजबूत होगी.
भारतजेन का मल्टीलिंगुअल फाउंडेशन मॉडल
आईआईटी बॉम्बे के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम भारतजेन ने 17 बिलियन पैरामीटर वाला मल्टीलिंगुअल एआई मॉडल लॉन्च किया है, जिसका नाम भारतजेन परम 2 सत्रह बी है. यह मॉडल खास तौर पर भारतीय भाषाओं के लिए बनाया गया है और इसका इस्तेमाल सरकार, शिक्षा, हेल्थकेयर, खेती और बिजनेस में किया जा सकेगा. भारतजेन इस मॉडल को ओपन सोर्स भी करेगा ताकि डेवलपर्स और स्टार्टअप्स भारत केंद्रित एआई एप्लिकेशन बना सकें. भारतजेन को इंडिया एआई मिशन से 900 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है और यह सरकार के स्वदेशी एआई प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा लाभार्थी माना जा रहा है.
भारत के लिए स्वदेशी एआई क्यों बड़ा कदम है
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि भारत में डेवलपर्स की ऊर्जा दुनिया में सबसे ज्यादा है और भारत लोकल एआई मॉडल बनाने के लिए बहुत अच्छी स्थिति में है. स्वदेशी एआई मॉडल का मतलब है कि भारत का डेटा भारत में रहेगा, टेक्नोलॉजी का कंट्रोल भारत के पास होगा और देश अपनी जरूरत के हिसाब से एआई बना सकेगा. इससे सरकारी सेवाएं तेज होंगी, शिक्षा और हेल्थकेयर में डिजिटल बदलाव आएगा और स्टार्टअप्स को बड़ा फायदा मिलेगा.
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