India–US Trade Deal : भारत-अमेरिका के बीच हुआ व्यापार समझौता स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा और इंजीनियरिंग स्पेस सहित भारतीय एक्सपोर्टर्स को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में ज्यादा मार्केट एक्सेस देगा.
ईईपीसी इंडिया का कहना है कि अमेरिका के साथ गहरी व्यापारिक साझेदारी दोनों पक्षों के लिए अच्छी है.
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (ईईपीसी) के अनुसार, टैरिफ में कमी की वजह से 2030 तक 250 बिलियन डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात के टारगेट की ओर भारत को मजबूती मिलेगी. काउंसिल ने एक बयान में कहा, “अमेरिका इंजीनियरिंग सामानों का सबसे बड़ा बाजार है. ईईपीसी दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते के लिए फ्रेमवर्क जारी होने का स्वागत करता है. यह फ्रेमवर्क ड्यूटी और ट्रेड बैरियर को कम करता है.”
मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढावा
ईईपीसी का कहना है कि प्रस्तावित समझौता स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा और इंजीनियरिंग स्पेस सहित भारतीय एक्सपोर्टर्स को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में ज्यादा मार्केट एक्सेस देगा. दोनों देशों के बीच हुए समझौते में इस बात को बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर जो 25 फीसदी का टैरिफ लगाया था, उसे घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. इसके अलावा रूस से तेल खरीदने को लेकर जो शुल्क लगाए गए थे, उसे भी हटा लिया गया है. वहीं भारत को ऑटोमोटिव पार्ट्स के लिए एक प्रेफरेंशियल टैरिफ रेट कोटा भी मिलेगा.
यूएस बाजार में मुकाबले में आए भारतीय प्रोडक्ट
भारत-यूएस ट्रेड डील से इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट सेक्टर को अमेरिकी बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा वापस पाने में मदद मिलेगी. ईईपीसी ने कहा कि एमएसएमई इंजीनियरिंग एक्सपोर्टर्स को अमेरिका के साथ ट्रेड डील से काफी फायदा होने की उम्मीद है. ईईपीसी इंडिया को उम्मीद है कि आगे चलकर अमेरिका द्वारा सेक्शन 232 के तहत स्टील, एल्युमीनियम, ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स पर लगाई गई ड्यूटी भी कम हो जाएंगी.
ईईपीसी इंडिया का कहना है कि अमेरिका के साथ गहरी व्यापारिक साझेदारी दोनों पक्षों के लिए अच्छी है. एक बार जब अंतरिम डील साइन हो जाती है और एक बड़ा एग्रीमेंट हो जाता है, तो इंडियन इंजीनियरिंग सेक्टर में एक्सपोर्ट ग्रोथ बहुत ज्यादा बढ़ सकती है. यह 2030 तक 250 बिलियन डॉलर के इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट टारगेट को पाने में अहम योगदान देगा.
इसके अलावा, अमेरिका-भारत संयुक्त बयान ने भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र में आत्मविश्वास को बढ़ाया है. इस व्यापार समझौते से न केवल इंजीनियरिंग एक्सपोर्टर्स को कई पुराने खरीदार वापस पाने में मदद मिलेगी बल्कि नए कस्टमर भी मिलेंगे, जिससे आने वाले महीनों में एक्सपोर्ट ग्रोथ मजबूत होगी.
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