केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नया व्यापार समझौता भारत के किसानों, डेयरी उत्पादकों और ग्रामीण रोजगार को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाएगा. पीयूष गोयल ने विपक्षी नेता Rahul Gandhi के द्वारा लगाए गए आरोप पर जानकारी दी है और बताया है कि वे किसानों के साथ “फर्जी और स्क्रिप्टेड” बातचीत कर भ्रम फैला रहे हैं. उनके मुताबिक, मोदी सरकार ने किसानों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है.
गोयल कहते हैं कि ये सब स्क्रिप्टेड है और किसानों के हितों को मोदी सरकार ने पूरी तरह सुरक्षित रखा है. वे कहते हैं कि सोया मील और मक्का पर कोई छूट नहीं दी गई है, इसलिए किसानों को कोई नुकसान नहीं. सेब और अखरोट पर भी उन्होंने सच्चाई बताई है. उन्होंने कहा कि राहुल के वीडियो में कुछ लोग कह रहे हैं कि आयात से किसान बर्बाद हो जाएंगे, लेकिन गोयल ने फैक्ट्स से जवाब दिया. वे कहते हैं कि कांग्रेस के समय भी बहुत आयात होता था, फिर अब क्यों झूठ बोल रहे हो. प्रधानमंत्री मोदी हमेशा किसानों के साथ हैं, कई स्कीम्स लाए हैं जैसे आत्मनिर्भर भारत. किसान सुरक्षित, देश विकसित. अब आपको हम बताते हैं कि आखिर विपक्ष ने सरकार पर क्या-क्या आरोप लगाए हैं और असल में ट्रेड डील की सच्चाई क्या है.
| विपक्ष के आरोप | ट्रेड डील की सच्चाई |
| 1. सोया मील और मक्का (कॉर्न) पर छूट देकर किसानों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, आयात से बाजार बर्बाद हो जाएगा. | सोया मील और मक्का पर कोई छूट नहीं दी गई है. इसलिए किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं. सरकार ने कई बार कहा कि ये दोनों चीजें बिना किसी रियायत के रहेंगी. |
| 2. सेब का असीमित आयात हो जाएगा, जिससे भारतीय सेब किसानों की कमाई कम हो जाएगी और वे बर्बाद हो जाएंगे. | भारत पहले से ही हर साल 5 लाख 50 हजार टन सेब आयात करता है क्योंकि प्रोडक्शन से ज्यादा डिमांड है. इस डील में असीमित आयात नहीं, बल्कि छोटा कोटा दिया है जो मौजूदा आयात से बहुत कम है. न्यूनतम आयात मूल्य 80 रुपये प्रति किलो रखा है, ऊपर से 25 रुपये ड्यूटी लगेगी, तो कुल लैंडेड कॉस्ट 105 रुपये प्रति किलो हो जाएगा. जबकि अभी आयातित सेब का लैंडेड कॉस्ट 75 रुपये है. इससे आयात महंगा हो जाएगा, किसानों को फायदा. |
| 3.अखरोट का आयात बढ़ाकर लोकल किसानों को नुकसान होगा, बाजार में सस्ता माल आएगा. | भारत पहले से 60,000 टन अखरोट आयात करता है डिमांड पूरी करने के लिए. इस डील में सिर्फ 13000 मेट्रिक टन का कोटा दिया है, वो भी थोड़ी कम आयात ड्यूटी पर. इतने छोटे कोटे से कोई नुकसान नहीं होगा. |
| 4.कांग्रेस के समय आयात के दरवाजे बंद थे, अब मोदी सरकार ने खोल दिए जिससे किसान तबाह हो रहे हैं. | कांग्रेस सरकार में भारत हर साल करीब 20 बिलियन डॉलर के कृषि उत्पाद आयात करता था, जिसमें डेयरी भी शामिल थी. कमी होने पर आयात हमेशा से होता रहा है, ये कोई नई बात नहीं. अब भी किसानों के हित पहले हैं. |
| 5.डेयरी सेक्टर को इस डील से नुकसान होगा | सरकार ने साफ कहा है कि दूध के सभी रूपों जैसे चीज, मक्खन, घी, क्रीम, दही, बटरमिल्क, व्हे और पनीर पर अमेरिका से कोई बाजार एक्सेस नहीं दिया गया है. मतलब अमेरिकी डेयरी प्रोडक्ट्स को भारत में बेचने की कोई छूट या रास्ता नहीं खोला गया, ताकि हमारे दूध और डेयरी किसानों के हित पूरी तरह बचे रहें. |
भारत को ट्रेड डील से मिलेंगे कई फायदे
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