India America Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन समझौते की कोई तय समयसीमा नहीं है. सरकार का कहना है कि डील तभी होगी जब दोनों पक्ष संतुष्ट होंगे. इस बीच पीयूष गोयल और अमेरिकी मंत्रियों के बीच वर्चुअल बैठक हो चुकी है. वहीं, तेल आयात और ईरान संकट के असर पर सरकार ने अपना रुख रखा है, जबकि अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव का आकलन सेक्टरवार आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा. इसके साथ ही यूके, ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के माध्यम से नए निर्यात बाजार तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें इसी कैलेंडर वर्ष में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है.
मंत्रालय ने बताया कि भारत और अमेरिका दोनों ही पॉजिटिव रुख के साथ बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं और ट्रेड डील को लेकर उम्मीद बनी हुई है. हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का भारतीय निर्यात पर कितना असर पड़ा है, इसका सही आकलन सेक्टरवार आंकड़ों के विश्लेषण के बाद ही किया जा सकता है.
अमेरिकी टैरिफ का असर
मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका को होने वाला निर्यात फिलहाल “मिली-जुली तस्वीर” पेश करता है. फार्मा सेक्टर का निर्यात लगातार बना हुआ है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक सामानों का निर्यात टैरिफ न लगने के कारण बढ़ा है. दूसरी ओर, समुद्री उत्पादों के निर्यात में कुछ अवसर जरूर गंवाए गए हैं, लेकिन एक्सपोर्ट डायवर्सिफिकेशन के जरिए इस नुकसान की भरपाई की गई है, यानी अन्य देशों को निर्यात बढ़ाकर असर को काफी हद तक संतुलित कर लिया गया है. मंत्रालय ने बताया कि अमेरिकी टैरिफ का असर टेक्सटाइल सेक्टर के निर्यात पर देखने को मिला है. इसे ध्यान में रखते हुए सरकार एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन जैसी पहलों के जरिए निर्यात विविधीकरण पर जोर दे रही है. इसके साथ ही यूके, ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के माध्यम से नए निर्यात बाजार तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें इसी कैलेंडर वर्ष में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है.
ईरान के साथ भारत का व्यापार
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत तेल आयात के लिए अमेरिका के साथ-साथ पश्चिम एशिया के अपने पारंपरिक साझेदारों पर भी भरोसा बनाए रखेगा. वहीं, संघर्ष की स्थिति से गुजर रहे ईरान के साथ भारत का व्यापार फिलहाल सीमित है, जिसमें मुख्य तौर पर खाद्य उत्पाद और दवाइयां शामिल हैं. सरकार का कहना है कि ईरान के साथ व्यापार को लेकर अमेरिका आगे क्या कदम उठाता है, इस पर नजर रखी जा रही है. संभावित प्रतिबंधों की प्रकृति साफ होने के बाद ही भारत अपनी आगे की रणनीति तय करेगा.
इसके साथ ही भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर एक और पॉजिटिव संकेत सामने आया है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने साफ तौर पर कहा है कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण अब अंतिम पड़ाव के बेहद करीब है. उन्होंने बताया कि दोनों देशों की वार्ता टीमें लगातार संपर्क में हैं और लंबित मुद्दों पर वर्चुअल बैठकों के जरिए चर्चा जारी है. इसी क्रम में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और डिप्टी यूएसटीआर रिक स्विटजर की टीम ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर बातचीत को आगे बढ़ाया है.
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