Wheat Export : भारत ने तीन साल पहले महंगाई और घरेलू जरूरतों की वजह से गेहूं पर लगाए निर्यात प्रतिबंधों में ढील दी है. तीन साल बाद 5 लाख टन गेहूं का आटा, मैदा और सूजी देश के बाहर भेजे जाने की अनुमति मिली है.
डीजीएफटी ने कहा कि जो आवेदक इस उत्पाद का निर्यात करना चाहते हैं, उन्हें महानिदेशालय से अनुमति लेनी होगी और इसके लिए आवेदन करना होगा. अधिसूचना के मुताबिक, पहले चरण के तहत आवेदन 21 जनवरी, 2026 से 31 जनवरी, 2026 तक दिए जा सकते हैं. इसमें कहा गया कि इसके बाद जब तक निर्यात की निर्धारित मात्रा उपलब्ध रहेगी, तब तक हर महीने के अंतिम 10 दिनों के दौरान आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे.
6 महीने के लिए वैध रहेगा निर्यात
डीजीएफटी ने यह भी बताया है कि निर्यात का यह अधिकार जारी होने की तारीख से 6 महीने के लिए वैध होगा. निर्यातक, आटा मिलें या प्रसंस्करण इकाइयां इसके लिए आवेदन कर सकती हैं. हालांकि, उनके पास वैध आईईसी (आयात निर्यात कोड) और एफएसएसएआई (एफएसएसएआई) लाइसेंस होना चाहिए. निर्यात प्रसंस्करण इकाइयों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) के अलावा, ऐसे व्यापारी निर्यातक भी आवेदन कर सकते हैं जिनके पास वैध आईईसी और एफएसएसएआई लाइसेंस है. साथ ही उनका सहायक विनिर्माताओं के रूप में काम करने वाली आटा मिलों के साथ वैध अनुबंध या आपूर्ति समझौता है. हालांकि, निर्यात की मात्रा का निर्णय एक विशेष एक्जिम सुविधा समिति करेगी.
घरेलू डिमांड पूरी करने के लिए रोक
सरकार ने साल 2022 में ही गेहूं और उसके उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी थी, लेकिन कुछ जरूरतमंद देशों को इसका निर्यात जारी रहा. जैसे चालू वित्तवर्ष में सरकार ने 2 लाख टन गेहूं नेपाल को दिया. इसी तरह, भूटान और माली सहित अन्य देशों को भी जरूरत पर सोने का निर्यात किया गया. हालांकि, इस आपात निर्यात को छोड़ दिया जाए तो अप्रैल से अक्टूबर 2025 तक महज 12 हजार टन गेहूं का ही निर्यात हुआ है. सरकार ने महंगाई की वजह से गेहूं के निर्यात पर बैन लगा रखा है.
क्या सामान जाएगा देश के बाहर
जीडीएफटी ने गेहूं के आटे के अलावा मैदा और सूजी जैसे गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है. 5 लाख टन का यह निर्यात किसी एक देश को नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल मार्केट के लिए खोला गया है. खास बात ये है कि सरकार ने गेहूं का निर्यात अब भी रोक रखा है और सिर्फ उससे बने प्रोडक्ट ही बाहर भेजने की अनुमति दी है. इसका मकसद घरेलू ब्रांड को बढ़ावा देना और भारतीय एग्री प्रोडक्ट के लिए नए बाजार की तलाश करना है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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