भारत अमेरिका के नेतृत्व वाली ‘Pax Silica’ पहल में शामिल होने जा रहा है, जिसका उद्देश्य एआई युग में आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना और चीन पर निर्भरता कम करके सुरक्षित सप्लाई चेन तैयार करना है. इस पहल के तहत सिलिकॉन, अहम खनिजों और ऊर्जा संसाधनों को रणनीतिक संपत्ति मानकर सदस्य देश आपसी सहयोग बढ़ाएंगे. ऑस्ट्रेलिया, इज़राइल, जापान, दक्षिण कोरिया, कतर, सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात पहले ही इससे जुड़ चुके हैं.
आज दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर होने वाले हैं. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब हेलबर्ग इस मौके पर मौजूद रहेंगे. इस साझेदारी से सदस्य देश कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे. जैसे 6जी कनेक्टिविटी, डेटा सेंटर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, खनिज प्रसंस्करण (Mineral processing) और ऊर्जा अवसंरचना (Energy infrastructure). ये सब मिलकर वैश्विक टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन को बेहतर और सुरक्षित बनाएंगे. भारत के लिए यह बहुत खास साबित होगा.
भारत को मिलेंगे पैक्स सिलिका में शामिल होने पर कई फायदे
देश को हाई क्वालिटी चिप बनाने, सप्लाई चेन को विविध बनाने और टेक्नोलॉजी में नए निवेश के मौके मिलेंगे. साथ ही वैश्विक टेक्नोलॉजी मानकों को तय करने में भारत की आवाज और मजबूत होगी. भारत-अमेरिका के बीच सेमीकंडक्टर, एआई और रक्षा क्षेत्र में सहयोग भी बढ़ेगा.
फरवरी 2026 में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका का दौरा किया था. वहां उन्होंने महत्वपूर्ण मिनरल्स पर मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया और पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी को अंतिम रूप देने की बातचीत की थी. अमेरिकी अधिकारियों ने भारत को इस पहल में शामिल होने का न्योता दिया था और अब आज हस्ताक्षर हो रहे हैं. यह कदम भारत को एआई और सेमीकंडक्टर के वैश्विक खेल में मजबूत जगह देगा.
भारत-अमेरिका मिलकर करेंगे काम
यह पहल ट्रंप प्रशासन की है जो सिलिकॉन आधारित टेक्नोलॉजी की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर फोकस कर रही है. भारत जैसे बड़े टेक्नोलॉजी बाजार के शामिल होने से अमेरिका को बड़ी जीत मिली है. भारत BRICS का सदस्य है लेकिन यह कदम दिखाता है कि टेक्नोलॉजी और आर्थिक सुरक्षा में भारत अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहता है. इससे भारत की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की कोशिशें और तेज होंगी. सरकारी योजनाओं और निवेश से भारत पहले से ही इस दिशा में आगे बढ़ रहा है. पैक्स सिलिका में शामिल होकर भारत को नए अवसर मिलेंगे और चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. यह भारत-अमेरिका दोस्ती का एक नया अध्याय है जो भविष्य की टेक्नोलॉजी पर असर डालेगा.
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