20 की उम्र: आदत बनाएं, रकम की चिंता कम करें
20 के दशक में सबसे जरूरी है निवेश की आदत डालना. इस समय बड़ी रकम जमा करना लक्ष्य नहीं होता. अगर आप अपनी टेक-होम सैलरी का 15 से 20 प्रतिशत नियमित निवेश कर पा रहे हैं, तो आप सही दिशा में हैं. 25 साल की उम्र में 10,000 रुपये महीने का निवेश भी 30-35 साल में कंपाउंडिंग के कारण बड़ी रकम में बदल सकता है. नौकरीपेशा लोगों के लिए Employees’ Provident Fund (EPF) एक मजबूत आधार देता है. इसके साथ इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP शुरू करना ग्रोथ बढ़ा सकता है. कोशिश करें कि 30 की उम्र तक कम से कम एक साल की आय के बराबर निवेश तैयार हो जाए.
30 की उम्र: रफ्तार बढ़ाने का समय
30 का दशक आमदनी बढ़ने का समय होता है, लेकिन खर्च भी बढ़ते हैं- घर, बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियां. यही वह दौर है जब रिटायरमेंट प्लानिंग को गंभीरता से लेना चाहिए. 35 की उम्र तक 2-3 गुना वार्षिक आय और 40 तक 4-5 गुना आय के बराबर निवेश का लक्ष्य उपयोगी माना जाता है. इसमें EPF, NPS, इक्विटी फंड और अन्य दीर्घकालिक निवेश शामिल हों. अगर शुरुआत देर से हुई है तो इस दशक में बचत दर 25-30 प्रतिशत तक बढ़ानी चाहिए. सिर्फ सैलरी बढ़ने से भविष्य सुरक्षित नहीं होता, निवेश की दर भी बढ़नी चाहिए.
40 की उम्र: स्पष्ट गणित और सुधार
40 के बाद रिटायरमेंट अब दूर की बात नहीं लगती. बच्चों की उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य और करियर की अनिश्चितता जैसे मुद्दे सामने आते हैं. अब अनुमान नहीं, ठोस गणना की जरूरत होती है. अगर आप 60 की उम्र में हर महीने 2 लाख रुपये खर्च करना चाहते हैं, तो महंगाई और संभावित रिटर्न को ध्यान में रखकर लक्ष्य तय करें. 45 की उम्र तक 6-8 गुना वार्षिक आय और 50 तक 8-10 गुना आय का निवेश एक सामान्य मानक हो सकता है. अगर कमी है, तो खर्च नियंत्रित करें और निवेश बढ़ाएं.
50 की उम्र: पूंजी की सुरक्षा सबसे अहम
50 के बाद फोकस ग्रोथ से ज्यादा सुरक्षा पर होना चाहिए. रिटायरमेंट से पहले 12-15 गुना वार्षिक आय के बराबर फंड रखने का लक्ष्य सुरक्षित माना जाता है, हालांकि यह जीवनशैली और पेंशन पर निर्भर करेगा. इस समय एसेट एलोकेशन अहम हो जाता है. बहुत ज्यादा इक्विटी बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ा सकती है, जबकि बहुत कम ग्रोथ भविष्य में धन की कमी का कारण बन सकती है. कोशिश करें कि इस उम्र तक बड़े कर्ज, खासकर होम लोन, खत्म हो जाएं. आखिर में कोई एक जादुई संख्या नहीं होती, लेकिन जल्दी शुरुआत और नियमित निवेश आपके भविष्य को ज्यादा विकल्प देता है.
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