भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है. मध्य पूर्व में जारी युद्ध और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय कर सकती हैं. इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दर फैसला और महंगाई के आंकड़े भी निवेशकों की नजर में रहेंगे.
दलाल स्ट्रीट पर भू-राजनीतिक संकट की नजर, फेड फैसले और तेल पर टिकी उम्मीद. (Image:AI)
कच्चे तेल की कीमतें सबसे बड़ा फैक्टर
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतक बन गई हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है. यदि मध्य पूर्व में संघर्ष और बढ़ता है या ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है तो तेल और महंगा हो सकता है. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली होती है, क्योंकि महंगा तेल महंगाई और व्यापार घाटे को बढ़ा सकता है. यही कारण है कि निवेशक इस समय तेल की कीमतों पर खास नजर बनाए हुए हैं.
होरमुज जलडमरूमध्य बना बाजार का केंद्र
ऊर्जा बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर हो रही है. यह संकरा समुद्री रास्ता दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है. अगर यहां जहाजों की आवाजाही में बाधा आती है तो वैश्विक आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस मार्ग पर लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं. इससे एशिया के कई देशों में महंगाई की चिंता बढ़ सकती है और निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कमजोर पड़ सकता है.
पिछले हफ्ते बाजार में आई बड़ी गिरावट
पिछला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी कठिन रहा. सेंसेक्स में 4,300 से ज्यादा अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी 5 प्रतिशत से अधिक फिसल गया. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कमजोर होता रुपया और महंगा तेल बाजार के लिए दबाव का कारण बने. एक ही दिन में सेंसेक्स लगभग 1,500 अंक तक गिर गया था, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई. इसके साथ ही रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर नए रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया.
विदेशी निवेशकों की भूमिका अहम
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. मार्च के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 52,700 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. इसका मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितता, कमजोर रुपया और महंगा तेल बताया जा रहा है. जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में बिकवाली करते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है. इसलिए निवेशक इस बात पर भी नजर रखेंगे कि आने वाले दिनों में विदेशी निवेश का रुख कैसा रहता है.
फेड का फैसला और वैश्विक आंकड़े भी अहम
इस सप्ताह वैश्विक आर्थिक घटनाएं भी बाजार को प्रभावित कर सकती हैं. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, यूरोप और अमेरिका के महंगाई आंकड़े तथा रोजगार से जुड़े डेटा निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे. यदि ब्याज दरों को लेकर सख्त संकेत मिलते हैं तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व का तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक दलाल स्ट्रीट में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. इसलिए निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है.
About the Author
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.