Iran Conflict : ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच भारत से जा रहा करीब 345 करोड़ रुपये का सामान 10 दिनों से बंदरगाहों पर अटका हुआ है. यह सामान 1 मार्च तक ईरान पहुंचना था, लेकिन युद्ध संकट की वजह से अभी तक भारत में ही अटका हुआ है. हालांकि, एक सवाल यह भी उठता है कि प्रतिबंधों और युद्ध के बीच भारत कैसे ईरान को निर्यात कर पा रहा है.
भारत से आज भी ईरान को अनाज और दवाओं का निर्यात होता है.
ईरान को एक मार्च तक निर्यात किया जाने वाला 35,962 टन चावल, चाय और दवाओं की खेप कांडला बंदरगाह पर अटकी रही, जिसका ‘फ्री ऑन बोर्ड’ (एफओबी) मूल्य 305.67 करोड़ रुपये है. एफओबी में माल और बंदरगाह से जहाज पर लादने तक का खर्च शामिल होता है. इसी तरह, मुंद्रा बंदरगाह पर ईरान को निर्यात के लिए 5,676 टन माल अटका हुआ था, जिसका मूल्य 40.72 करोड़ रुपये है.
क्या निर्यात करता है भारत
प्रसाद ने बताया कि ईरान के साथ भारत का व्यापार मुख्य रूप से अनाज और दवाओं का है. पश्चिम एशिया के मौजूदा घटनाक्रमों के कारण माल की आवाजाही पर असर पड़ा है. ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है. ईरान भारतीय बासमती चावल के प्रमुख खरीदारों में से है. यही वजह है कि युद्ध के बीच भी हम उसे इन चीजों का निर्यात कर रहे हैं. फिलहाल यह सामान कब तक बंदरगाहों पर अटके रहेंगे, इसका अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है.
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