इंफोसिस ने एंथ्रोपिक (Anthropic) के साथ ऐतिहासिक साझेदारी कर आईटी जगत में हलचल मचा दी है. बेंगलुरु में आयोजित Investor AI Day 2026 में कंपनी ने खुलासा किया कि कैसे ‘Claude’ एआई मॉडल्स के जरिए पुराने कोडिंग सिस्टम को 60% तेजी से बदला जा रहा है. जहां एक तरफ ऑटोमेशन से पुरानी भूमिकाओं पर संकट है, वहीं 170 मिलियन नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है. क्या इंफोसिस का यह ‘एआई-फर्स्ट’ मॉडल भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए वरदान साबित होगा या अभिशाप? क्या आप इस नए एआई युग के लिए तैयार हैं? विस्तार से जानने के लिए क्लिक करें.
साझेदारी की शुरुआत और बैकग्राउंड
इंफोसिस का इन्वेस्टर एआई डे 17 फरवरी 2026 को बेंगलुरु में हुआ, जहां कंपनी ने एआई पर फोकस किया. प्रेजेंटेशन में दिखाया गया कि एआई अब तक की सबसे तेजी से बढ़ने वाली तकनीक है.
उदाहरण के लिए-
एक ग्राफ में बताया गया कि एआई को 1 अरब यूजर्स तक पहुंचने में सिर्फ कुछ साल लगे, जबकि इंटरनेट को 20 साल और स्मार्टफोन को 10 साल लगे. एंथ्रोपिक के साथ साझेदारी इसी तेज बदलाव का हिस्सा है. एंथ्रोपिक क्लॉड नामक एआई मॉडल बनाती है, जैसे क्लॉड 2, क्लॉड सोनेट 4.5 और क्लॉड हाइकू 4.5. ये सभी मॉडल 2023 से 2025 तक तेजी से अपडेट हुए हैं. इन मॉडल्स में 100 अरब से ज्यादा पैरामीटर्स हैं, जो उन्हें बहुत स्मार्ट बनाते हैं. इंफोसिस अब इनका इस्तेमाल अपने क्लाइंट्स के लिए कर रही है, जैसे पुराने सॉफ्टवेयर को अपडेट करने में.
इंफोसिस के लिए क्या बदल रहा है?
- तकनीकी बदलाव: बताया गया कि एआई सिर्फ एक लेयर नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को बदलने वाली चीज है. इसमें टेक्नोलॉजी, बिजनेस, टैलेंट, ऑपरेटिंग मॉडल और मेंटल मॉडल सब शामिल हैं. एंथ्रोपिक के क्लॉड से इंफोसिस एआई-रेडी सिस्टम बना रही है, जैसे एआई-नेटिव आर्किटेक्चर. उदाहरण के तौर पर, हर्ट्ज कंपनी में इंफोसिस ने क्लॉड सोनेट का इस्तेमाल करके पुराने COBOL कोड (करीब 30 लाख लाइन्स) को 60 फीसदी तेजी से मॉडर्न जावा माइक्रोसर्विसेज में बदला. इससे लागत 60 फीसदी कम हुई और काम की स्पीड बढ़ी.
- बिजनेस और प्रोडक्टिविटी में क्रांति: कंपनी अब एआई को बिजनेस के कोर में डाल रही है. दिखाया गया है कि पुराने सिस्टम्स पर 60-80 फीसदी आईटी बजट खर्च होता है, जो सिक्योरिटी रिस्क बढ़ाते हैं और इनोवेशन रोकते हैं. एंथ्रोपिक की मदद से इंफोसिस एजेंटिक एआई यूज कर रही है, जहां मशीनें खुद फैसले लेती हैं. जैसे, रोल्स-रॉयस में इंजन रिपेयर का काम 40 फीसदी कम समय में हो रहा है, और फर्स्ट-टाइम राइट रेट 75 फीसदी तक पहुंच गया. इससे रेवेन्यू बढ़ता है और कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी 20-50 फीसदी तक बेहतर होती है.
- टैलेंट और वर्कफोर्स का नया रूप: एआई से पुराने जॉब्स जैसे फ्रंट-एंड डेवलपर्स या QA टेस्टिंग करने वाले कम हो रहे हैं, लेकिन नए जॉब्स जैसे एआई इंजीनियर या डेटा एनोटेटर बढ़ रहे हैं. प्रेजेंटेशन में WEF का डेटा है कि 92 मिलियन पुराने जॉब्स खत्म होंगे, लेकिन 170 मिलियन नए बनेंगे. इंफोसिस अपने कर्मचारियों को एआई ट्रेनिंग दे रही है, और एंथ्रोपिक के टूल्स से ह्यूमन-एआई वर्कफोर्स बना रही है. इससे कंपनी का टैलेंट पूल मजबूत होगा.
- पार्टनरशिप के अन्य फायदे: इंफोसिस सिर्फ एंथ्रोपिक से नहीं, बल्कि AWS, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल क्लाउड के साथ भी काम कर रही है. लेकिन क्लॉड मॉडल्स खास हैं, क्योंकि वे सुरक्षित और रिस्पॉन्सिबल एआई पर फोकस करते हैं. प्रेजेंटेशन में दिखाया गया कि एआई इन्वेस्टमेंट 2023 में 24 अरब डॉलर से 2025 में 140 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इंफोसिस के 90 फीसदी बड़े क्लाइंट्स जैसे लिबर्टी ग्लोबल, डैंस्क बैंक और सिटिजन्स बैंक अब एआई सर्विसेज यूज कर रहे हैं, जहां NPS 30 फीसदी बेहतर हुआ और आउटेज 50 फीसदी कम.
- चुनौतियां और भविष्य: बताया गया है कि एआई प्रोग्रेस एंटरप्राइज रेडीनेस से आगे है, मतलब कंपनियां अभी तैयार नहीं हैं. लेकिन इंफोसिस एंथ्रोपिक के साथ मिलकर इस गैप को भर रही है. कंपनी बिल्ड vs बाय पर बैलेंस बना रही है, जहां 23 फीसदी आईटी खर्च AI पर है. इससे इंफोसिस का ब्रांड मजबूत होगा, और बाजार में लीडर बनेगी.
कुल मिलाकर, यह साझेदारी इंफोसिस को एक साधारण आईटी कंपनी से एआई-फर्स्ट कंपनी बनाने वाली है. पहले जहां काम मैनुअल था, अब एआई एजेंट्स ऑटोमेट करेंगे. कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कहा कि एआई ट्रांजिशन अलग है, क्योंकि यह रूट एंड ब्रांच सर्जरी जैसा है- पूरी तरह बदलाव.
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मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे …और पढ़ें
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