आपको बता दें कि इस तनाव के चलते अल्यूमिनियम की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं. कतर और बहरीन के प्रमुख स्मेल्टर्स में डिलीवरी रुक गई है, जिससे खरीदारों को एशिया से सामान ढूंढना पड़ रहा है. पर्सियन गल्फ के प्रोड्यूसर्स दुनिया के लगभग 8% अल्यूमिनियम सप्लाई करते हैं (इंटरनेशनल अल्यूमिनियम इंस्टीट्यूट के अनुसार). अल्यूमिनियम बनाने में बहुत एनर्जी लगती है और रॉ मटेरियल शिप से आयात होते हैं, इसलिए रुकावट से कीमतें तेजी से बढ़ीं.
हीलियम पर भी पड़ा असर
इसके अलावा हीलियम पर भी बड़ा असर पड़ा है. कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हीलियम सप्लायर है (अमेरिका के बाद), जो सेमीकंडक्टर, एमआरआई मशीनों, डिफेंस टेक्नोलॉजी और रिसर्च लैब्स के लिए जरूरी है. ईरान ने कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया, जहां हीलियम फैसिलिटीज हैं. अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो दुनिया की एक चौथाई से ज्यादा हीलियम सप्लाई कट सकती है.
सल्फर और यूरिया
न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और इजराइल के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के कारण, सल्फर और यूरिया (खाद के लिए जरूरी) की कीमतें 35% तक बढ़ गई हैं. सल्फर ऑयल-गैस रिफाइनिंग का बायप्रोडक्ट है और मेटल्स (जैसे कॉपर) को काटने-शेप देने में मदद करता है. दुनिया का आधा सल्फर पर्सियन गल्फ साइड पर ट्रैप हो गया है (CRU Group के अनुसार). यूरिया (नाइट्रोजन खाद) का एक तिहाई ट्रेड होर्मुज से गुजरता है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में नेचुरल गैस से बनता है. युद्ध से प्लांट्स बंद होने और शिपिंग रुकने से किसानों के लिए खाद महंगी हो गई है.
इथेनॉल और चीनी
इथेनॉल और चीनी पर भी इस तनाव का प्रभाव पड़ा है. ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा सुगरकेन प्रोड्यूसर है. ऑयल महंगा होने से इथेनॉल (कार फ्यूल) की कीमतें 10% बढ़ीं, इसलिए मिलें चीनी की बजाय ज्यादा प्रॉफिटेबल इथेनॉल पर फोकस कर सकती हैं. इससे चीनी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, खासकर हार्वेस्ट शुरू होने पर.
युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रुकने से खाद्य सामग्री की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है. भारतीय बासमती चावल के करीब 4 लाख टन का जहाज बंदरगाहों पर या समुद्र में फंसा हुआ है, क्योंकि जहाजों की कमी है. ऑस्ट्रेलियाई मीट और इंडोनेशियाई कॉफी जैसी कार्गो को देरी हो रही है या वैकल्पिक लंबे रास्तों से जाना पड़ रहा है. तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, UAE को ताजे फल-सब्जियों का सबसे बड़ा सप्लायर ईरान है. ऐसे में ईरान ने सभी खाद्य और कृषि उत्पादों के निर्यात पर अगले आदेश तक पूरी तरह रोक लगा दी है. इस वजह से UAE की Lulu ग्रुप जैसी रिटेल कंपनियां अब फ्रेश खाने के प्रोडक्ट लाने के लिए कार्गो फ्लाइट्स चार्टर कर रही हैं.
हालांकि, UAE की अल खलीज शुगर रिफाइनरी ने कहा है कि उनके पास घरेलू और क्षेत्रीय मांग पूरी करने के लिए दो साल तक चीनी का पर्याप्त स्टॉक है. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर संघर्ष लंबा चला तो लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत और सप्लाई में रुकावट से खाद्य पदार्थों की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं. यह युद्ध लंबा चला तो अल्यूमिनियम, हीलियम, खाद जैसी चीजों की कमी से इंडस्ट्री और किसानी प्रभावित होगी. भारत जैसे देशों में महंगाई बढ़ सकती है, क्योंकि हम कई कमोडिटीज आयात करते हैं.
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