अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) ने फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘Sunday Morning Futures’ में चीन के बाजारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. बेसेंट ने कहा, “चीन में हालात कुछ अनियंत्रित हो गए हैं… उन्हें मार्जिन आवश्यकताएं कड़ी करनी पड़ रही हैं. मुझे यह सोने में क्लासिक सट्टा उछाल (Speculative Bubble) जैसा लगता है.” उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि सोने की कीमतों में यह बेतहाशा उछाल किसी आर्थिक जरूरत से नहीं, बल्कि चीनी बाजारों में मची उथल-पुथल और सट्टेबाजी का नतीजा है.
क्या चीन के पास है सोने का रिमोट कंट्रोल
मार्केट एक्सपर्ट्स अब यह मानने लगे हैं कि वैश्विक गोल्ड मार्केट का केंद्र अब लंदन या न्यूयॉर्क से खिसककर शंघाई की ओर जा रहा है. एमकेएस पैंप की रिसर्च और मेटल्स स्ट्रैटेजी प्रमुख निकी शील्स ने CNBC से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है. शील्स का कहना है, “इस बार चीन ‘मुख्य चालक’ (Main Driver) रहा है. यह तेजी सट्टा पूंजी प्रवाह तथा रिटेल और संस्थागत खरीदारी से आई है, जिसमें ETF, फिजिकल बार और फ्यूचर्स पोजिशनिंग शामिल हैं. यानी आम चीनी नागरिक से लेकर बड़े संस्थान तक, सब इस सट्टेबाजी की रेस में शामिल हैं.
फ्यूचर्स ट्रेडिंग और लीवरेज का खतरनाक खेल
सोने में निवेश का पारंपरिक तरीका इसे खरीदकर तिजोरी में रखना होता था, लेकिन चीन ने इस खेल को ही बदल दिया है. कैपिटल इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 की शुरुआत से चीनी गोल्ड-समर्थित ETF होल्डिंग्स दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं. अर्थशास्त्री हमाद हुसैन ने इस पर चिंता जताते हुए कहा, “चीन के गोल्ड मार्केट में लीवरेज (उधार की पूंजी) बढ़ने के संकेत हैं, जो कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव ला सकते हैं.” उन्होंने चेतावनी दी कि फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स का बढ़ता यूज सुरक्षित निवेश तलाशने वाले निवेशकों की सामान्य प्रवृत्ति नहीं है. हुसैन के मुताबिक, “संभव है कि एक सट्टा बुलबुला (Speculative Bubble) बन रहा हो.”
शंघाई एक्सचेंज पर रिकॉर्ड तोड़ ‘सट्टेबाजी’
शंघाई फ्यूचर एक्सचेंज (Shanghai Futures Exchange) पर ट्रेडिंग वॉल्यूम के आंकड़े किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी हैं. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) के रे जिया का कहना है कि साल की शुरुआत से औसत दैनिक ट्रेडिंग करीब 540 टन तक पहुंच गई है. यह 2025 के 457 टन प्रतिदिन के पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर गई है. इतनी भारी मात्रा में ट्रेडिंग यह बताती है कि सोना अब गहनों या निवेश के लिए नहीं, बल्कि सट्टेबाजी के लिए इस्तेमाल हो रहा है.
आखिर चीन क्यों भाग रहा है सोने की ओर?
चीनी निवेशकों के इस व्यवहार के पीछे गहरी आर्थिक मजबूरी और रणनीतिक सोच छिपी है. ANZ रिसर्च के सीनियर चाइना स्ट्रैटेजिस्ट झाओपेंग शिंग के अनुसार, चीन में रियल एस्टेट बाजार की कमर टूट चुकी है और बैंकों में जमा दर महज 1% के करीब है. शिंग के मुताबिक, “वैकल्पिक वित्तीय परिसंपत्तियों तक सीमित पहुंच और गिरती प्रॉपर्टी कीमतों के कारण घरेलू निवेशक सोने की ओर रुख कर रहे हैं.” फिलहाल चीन की कुल घरेलू संपत्ति का केवल 1% सोने में है, जिसके भविष्य में 5% तक बढ़ने का अनुमान है.
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