आईटी सेक्टर के निवेशकों के लिए बीते कुछ दिन काफी भारी रहे हैं. लगातार तीन कारोबारी सत्रों में आई तेज बिकवाली से आईटी शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. इस दौरान बाजार से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू साफ हो चुकी है. AI ऑटोमेशन और नई तकनीकी घोषणाओं ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है.
आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई है. (Image:AI)
AI घोषणाओं से क्यों मचा हड़कंप
हालिया गिरावट की शुरुआत दो बड़ी घटनाओं से हुई. पहली, Anthropic द्वारा नए ऑटोमेशन टूल्स की घोषणा और दूसरी, Palantir का दावा कि उसका AI प्लेटफॉर्म अब SAP माइग्रेशन जैसे काम सालों की बजाय हफ्तों में पूरा कर सकता है. यह खबर निवेशकों के लिए चौंकाने वाली थी, क्योंकि ERP इम्प्लीमेंटेशन को अब तक AI से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था. इसी बयान के बाद IT शेयरों में बिकवाली तेज हो गई.
कितना बड़ा हो सकता है AI का असर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर AI की वजह से लो-लेवल कामों में 30–50% तक उत्पादकता घटती है, तो IT सर्विसेज की 9–12% कमाई अगले 3–4 साल में खत्म हो सकती है. यानी हर साल करीब 2% की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है. पहले ही एप्लिकेशन डेवलपमेंट, मेंटेनेंस और टेस्टिंग जैसे क्षेत्रों में 30–40% रेवेन्यू AI के जोखिम में माना जा रहा था. अब ERP और थर्ड-पार्टी सॉफ्टवेयर भी इस दायरे में आते दिख रहे हैं.
इतिहास क्या कहता है, क्या राहत की उम्मीद है
हालांकि इतिहास बताता है कि ऐसी टेक्नोलॉजिकल उथल-पुथल के बाद इंडस्ट्री ने खुद को ढाल लिया है. जैसे पहले क्लाउड कंप्यूटिंग और उससे पहले BPO सेक्टर में बदलाव आया था. कई पुराने रोल खत्म हुए, लेकिन समय के साथ नए अवसर भी बने. विश्लेषकों का मानना है कि AI से शुरुआती झटका जरूर लगेगा, लेकिन जब कंपनियां AI को अपनाकर नई सर्विसेज और सॉल्यूशंस तैयार करेंगी, तब ग्रोथ फिर रफ्तार पकड़ सकती है.
टेक्निकल लेवल और निवेशकों के लिए रणनीति
तकनीकी नजर से देखें तो Nifty IT के लिए 35,400 का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है. इस स्तर के नीचे फिसलने पर सेक्टर में और तेज गिरावट आ सकती है. वहीं, अगर इंडेक्स इस लेवल के ऊपर टिकता है, तो रिकवरी की उम्मीद बन सकती है. विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक घबराहट में फैसले न लें, मजबूत बैलेंस शीट और AI-अडॉप्शन पर काम कर रही कंपनियों पर फोकस रखें. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट चुनिंदा शेयरों में धीरे-धीरे निवेश का मौका भी बन सकती है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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