भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पांच राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों के मुद्रीकरण (Monetization) के लिए राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (RIIT) के 9,500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. यह सौदा 260 किलोमीटर लंबी सड़कों के लिए हुआ है जो झारखंड, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे चार राज्यों में फैली हुई हैं. इस एसेट मोनेटाइजेशन का मुख्य उद्देश्य चालू सड़कों से पूंजी जुटाकर उसे नए बुनियादी ढांचे के विकास में लगाना है. यह एक पब्लिक इनविट (Public InvIT) मॉडल है, जिसके जरिए भविष्य में आम निवेशक भी हाईवे से होने वाली टोल की कमाई में हिस्सेदार बन सकेंगे. NHAI की योजना अगले 3 से 5 वर्षों में 1,500 किलोमीटर के और एसेट्स को इस ट्रस्ट को सौंपने की है
यह कदम भारत सरकार की नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (NMP) का हिस्सा है. इस सौदे के जरिए सरकार चालू सड़कों से पूंजी निकालकर नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करना चाहती है. एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव के अनुसार, यह ‘पब्लिक इनविट’ (Public InvIT) मॉडल न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि आम नागरिकों को भी हाईवे की कमाई में हिस्सेदार बनने का मौका देगा.
क्या होता है एसेट मोनेटाइजेशन?
सरल शब्दों में कहें तो एसेट मोनेटाइजेशन का मतलब है सरकार द्वारा अपनी पहले से बनी-बनाई और चालू संपत्तियों (जैसे हाईवे, बिजली की लाइनें या गैस पाइपलाइन) से पैसा कमाना. सरकार इन संपत्तियों का मालिकाना हक अपने पास ही रखती है, लेकिन एक निश्चित समय के लिए इन्हें किसी प्राइवेट कंपनी या ट्रस्ट को लीज पर दे देती है. इसके बदले सरकार को एक मोटी रकम एकमुश्त मिल जाती है, जिसका उपयोग नए प्रोजेक्ट्स बनाने में किया जाता है.
RIIT ने क्यों दांव पर लगाए ₹9,500 करोड़?
राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (RIIT) ने इन पांच हाईवे सेक्शन के लिए इतनी बड़ी रकम इसलिए दी है क्योंकि ये सभी ‘हाई-ट्रैफिक’ वाले व्यस्त रूट हैं. इसमें झारखंड का गोरहर-बरवा अड्डा, आंध्र प्रदेश का चिलकलूरिपेट-विजयवाड़ा, तमिलनाडु का चेन्नई बाईपास और चेन्नई-टाडा सेक्शन, और कर्नाटक का नीलमंगला-तुमकुर सेक्शन शामिल है. ये औद्योगिक और वाणिज्यिक कॉरिडोर हैं, जहां भविष्य में ट्रैफिक और टोल कलेक्शन बढ़ने की पूरी गारंटी है.
RIIT कैसे करेगी कमाई?
RIIT के रेवेन्यू मॉडल को आप इन तीन बिंदुओं से समझ सकते हैं
- टोल कलेक्शन: इन सड़कों से गुजरने वाले हर वाहन से मिलने वाला टोल अब सीधे RIIT के पास जाएगा. ये एसेट्स पहले से ही चालू हैं, इसलिए इनमें निवेश का जोखिम न के बराबर है.
- महंगाई के साथ बढ़ती दरें: नेशनल हाईवे पर टोल की दरें थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से जुड़ी होती हैं. जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती है, टोल के रेट भी बढ़ते हैं, जिससे ट्रस्ट की कमाई अपने आप बढ़ जाती है.
- अतिरिक्त सेवाएं: हाईवे के किनारे पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट और विज्ञापन होर्डिंग्स के जरिए मिलने वाला किराया भी ट्रस्ट के राजस्व का हिस्सा होता है.
आम निवेशक को क्या मिलेगा?
चूंकि यह एक ‘पब्लिक इनविट’ है, इसलिए आने वाले समय में रिटेल निवेशक इसमें म्यूचुअल फंड की तरह यूनिट्स खरीद सकेंगे. सेबी के नियमों के मुताबिक, इनविट को अपनी शुद्ध कमाई का 90% हिस्सा अपने निवेशकों को डिविडेंड या ब्याज के तौर पर बांटना अनिवार्य है. यानी, देश के हाईवे पर चलने वाली गाड़ियों से होने वाली कमाई सीधे आपकी जेब तक पहुँच सकती है. अगले 3 से 5 सालों में NHAI ने करीब 1,500 किलोमीटर की और सड़कों को इसी मॉडल के तहत मोनेटाइज करने की योजना बनाई है. यह भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निजी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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