1,75,000 के पार जाएगा सोना
5 मार्च 2026 को ब्लूमबर्ग में छपे एक इंटरव्यू के अनुसार, जॉय अलुक्कास ने कहा है कि सोने की कीमतें आने वाले सालों में और ऊपर जाएंगी. वजह? जियोपॉलिटिकल रिस्क्स (जैसे मिडिल ईस्ट टेंशन्स) और इकोनॉमिक अनिश्चितताएं. इस समय वे खुद 16,000 किलोग्राम सोना होल्ड कर रहे हैं, जो उनकी कंपनी की स्ट्रैटेजी को दिखाता है – “जब भी अनिश्चितता बढ़ती है, सोना सेफ हेवन बन जाता है.”
जॉय का मानना है कि ग्लोबल इवेंट्स से गोल्ड 5,500-5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. भारत के ज्वेलरी मार्केट के लिए ये अच्छी खबर है, जहां फेस्टिव सीजन में डिमांड हमेशा हाई रहती है.
अभी (मार्च 2026) दिल्ली में सोना लगभग ₹1,61,000 के आसपास चल रहा है. जॉय की भविष्यवाणी का मतलब है कि आने वाले समय में यह पौने दो लाख (1.76 लाख) के स्तर को पार कर सकता है.
जॉय अलुक्कास की सक्सेस स्टोरी
जॉय अलुक्कास का जन्म 29 अक्टूबर 1956 को केरल के त्रिशूर में एक बड़े परिवार में हुआ था. 15 भाई-बहनों वाले इस परिवार में वे 11वें नंबर पर थे. उनके पिता अलुक्का जोसेफ वर्गीज (Alukka Joseph Varghese) एक साधारण ज्वेलर थे, जिन्होंने 1956 में त्रिशूर में एक छोटी-सी ज्वेलरी की दुकान शुरू की थी. उस समय यह कोई शानदार शोरूम नहीं था, बल्कि स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए पारंपरिक दक्षिण भारतीय आभूषण बेचने वाली साधारण दुकान थी.
कम उम्र में ही जॉय ने पढ़ाई छोड़कर परिवार के कारोबार में हाथ बंटाना शुरू कर दिया. लेकिन उनकी सोच सीमित नहीं थी. 1980 के दशक के आखिर में उन्होंने खाड़ी देशों में बढ़ती संभावनाओं को पहचाना. 1987 में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में पहला विदेशी स्टोर खोला. उस दौर में यह कदम बेहद जोखिम भरा माना जाता था, क्योंकि ज्यादातर भारतीय ज्वेलरी कारोबार छोटे पारिवारिक स्तर तक ही सीमित थे.
जॉय ने इस कारोबार को पेशेवर ढंग से आगे बढ़ाया. उन्होंने ब्रांडिंग पर जोर दिया, बॉलीवुड सितारों को ब्रांड एंबेसडर बनाया और क्वालिटी को प्राथमिकता दी. यही वजह रही कि जॉयालुक्कास दुनिया की पहली ज्वेलरी चेन बनी, जिसे ISO 9001 और 14001 प्रमाणपत्र मिले. आज यह ब्रांड 12 देशों में 190 से ज्यादा शोरूम के साथ दुनिया की सबसे बड़ी निजी ज्वेलरी चेन में से एक बन चुका है.
अरबों की संपत्ति और कारोबारी साम्राज्य
फोर्ब्स की रियल-टाइम अरबपति सूची के अनुसार मार्च 2026 तक जॉय अलुक्कास की कुल संपत्ति लगभग 5.2 अरब डॉलर यानी करीब 43–45 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है. वैश्विक स्तर पर वे लगभग 820वें स्थान पर हैं.
2025 में एक समय उनकी संपत्ति लगभग 6.7 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी और वे सबसे अमीर मलयाली भी बने थे. वहीं हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में उनकी संपत्ति करीब ₹88,430 करोड़ बताई गई थी और वे सूची में 24वें स्थान पर रहे.
उनकी अधिकांश संपत्ति जॉयालुक्कास ग्रुप से आती है, जो सोना, हीरे और कीमती आभूषणों का विशाल अंतरराष्ट्रीय कारोबार चलाता है. लेकिन उनकी कहानी सिर्फ धन की नहीं, बल्कि दूरदर्शिता और मेहनत की मिसाल है.
तीन पीढ़ियों की विरासत से बना वैश्विक ब्रांड
इस ज्वेलरी साम्राज्य की नींव 1956 में त्रिशूर में पड़ी थी, जब उनके पिता ने एक छोटी दुकान शुरू की थी. उस दौर में ज्वेलरी बाजार बेहद असंगठित था और बड़े ब्रांड लगभग न के बराबर थे.
1987 में अबू धाबी में पहला स्टोर खुलने के बाद कंपनी ने खाड़ी देशों में तेजी से विस्तार किया. 1990 के दशक में सऊदी अरब, ओमान और अन्य मध्य-पूर्वी बाजारों में ब्रांड की मौजूदगी बढ़ी. 2000 के दशक में भारत में बड़े-बड़े शोरूम खुलने लगे और ब्रांड की पहचान मजबूत होती चली गई.
आज जॉयालुक्कास ग्रुप हजारों कर्मचारियों के साथ वैश्विक स्तर पर काम कर रहा है. कंपनी ने ऑनलाइन बिक्री, डिजिटल ब्रांडिंग और स्थायी व्यापार मॉडल जैसे नए प्रयोग भी शुरू किए हैं. अंतरराष्ट्रीय कारोबार की जिम्मेदारी अब उनके बेटे जॉन पॉल संभाल रहे हैं.
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