श्रम और रोजगार मंत्रालय ने चार नई श्रम संहिताएं लागू की हैं, जिनमें पुराने 29 कानूनों को मिलाकर सरल और मजबूत ढांचा तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य मजदूरों को बेहतर वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण देना है. खास तौर पर एमएसएमई और खदान मजदूरों को इसका फायदा मिलेगा. सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत एमएसएमई कर्मचारियों के अधिकार मजबूत हुए हैं और उन्हें कर्मचारियों की संख्या के आधार पर सामाजिक सुरक्षा का कवरेज मिलेगा.
खास तौर पर एमएसएमई यानी छोटे और मध्यम उद्यमों के कामगारों और खदान मजदूरों के लिए ये बहुत फायदेमंद साबित हो रही हैं. एमएसएमई क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के अधिकार अब और मजबूत हो गए हैं. सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत सभी एमएसएमई कर्मचारी कवर हो गए हैं और ये पात्रता कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तय होती है.
एमएसएमई क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को मिलेंगे ये फायदे
- हर मजदूर को न्यूनतम वेतन की गारंटी मिलेगी.
- समय पर वेतन का भुगतान अब अनिवार्य है अगर देरी हुई तो नियोक्ता जवाबदेह होंगे.
- काम के घंटे स्टैंडर्ड रखे गए हैं यानी रोजाना 8 घंटे और हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा नहीं.
- ओवरटाइम करने पर दोगुना वेतन मिलेगा और पेड लीव्स यानी वेतन सहित छुट्टियां भी मिलेंगी.
ये सब कर्मचारियों की संख्या पर आधारित है लेकिन छोटे-बड़े सभी एमएसएमई में लागू होता है. काम की जगह पर स्वच्छता, पीने का पानी, पर्याप्त रोशनी और आराम की सुविधा भी सुनिश्चित की गई है. इससे एमएसएमई मजदूरों का जीवन आसान और सुरक्षित बन रहा है. काम अब सिर्फ मेहनत नहीं बल्कि सम्मान और अधिकार का भरोसा बन गया है.
खदान मजदूरों की सुरक्षा पर फोकस
खदान मजदूरों की सुरक्षा को भी नया कवच मिला है. व्यावसायिक सुरक्षा स्वास्थ्य और कार्य परिस्थिति संहिता 2020 के तहत एक्सीडेंट का प्रावधान मजबूत किया गया है. घर से वर्कप्लेस आते-जाते हुए होने वाला एक्सीडेंट अब रोजगार से जुड़ा माना जाएगा अगर वो रोजगार की शर्तों से संबंधित हो. सरकार ने सेंट्रल स्तर पर कार्यस्थल की सुरक्षा और स्वास्थ्य के स्टैंडर्ड नोटिफाई किए हैं ताकि हर जगह एक समान नियम हों.
- सभी मजदूरों को फ्री एनुअल हेल्थ चेकअप मिलेगा.
- काम के घंटे 8 घंटे रोजाना और 48 घंटे हफ्ते में तय हैं जिससे स्वास्थ्य और वर्क लाइफ बैलेंस बना रहेगा.
- खदानों जैसे खतरनाक जगहों पर काम करने वालों की सुरक्षा पहले से ज्यादा पक्की हो गई है.
- अगर कोई हादसा होता है तो बेहतर मुआवजा मिलेगा और काम की परिस्थितियां स्टैंडर्ड होंगी.
ये चार संहिताएं आत्मनिर्भर भारत के लिए लेबर रिफॉर्म्स का हिस्सा हैं. सरकार का लक्ष्य है कि मजदूर मजबूत हों तो उद्योग भी मजबूत होंगे. पहले कानून जटिल थे लेकिन अब सब कुछ सरल और पारदर्शी हो गया है. एमएसएमई मालिकों को अनुपालन में थोड़ी मेहनत लगेगी लेकिन सरकार डिजिटल मदद और सपोर्ट दे रही है. कुल मिलाकर ये बदलाव करोड़ों मजदूरों के लिए राहत लेकर आया है. खदान मजदूरों को नया सुरक्षा कवच मिला है और एमएसएमई वर्कर्स के अधिकार मजबूत हुए हैं.
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