रियल एस्टेट सेक्टर में अटकी परियोजनाएं लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई हैं. हजारों होमबायर्स अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे हैं. सरकार अब प्री-रेरा प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू करने की तैयारी में है. इसके लिए एक विशेष फंड बनाने का प्रस्ताव सामने आया है.
अधूरे घरों को मिलेगी नई उम्मीद, हाउसिंग सेक्टर के लिए मनोहर लाल खट्टर का बड़ा प्रस्ताव. (Image:PTI)
प्री-रेरा अटकी परियोजनाओं के लिए अलग फंड की तैयारी
मंत्री ने कहा कि रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी Real Estate (Regulation and Development) Act लागू होने से पहले मंजूर कई प्रोजेक्ट आज भी अधूरे पड़े हैं. इन प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाले हजारों परिवार अपने घर का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में एक विशेष फंड तैयार कर इन परियोजनाओं को वित्तीय मदद दी जा सकती है. उद्योग जगत की ओर से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के सरकारी समर्थन वाले फंड का सुझाव भी दिया गया है. मंत्री ने कहा कि फंड का आकार और ढांचा बातचीत से तय किया जा सकता है, लेकिन समय पर वित्त उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है.
स्लम पुनर्विकास और सस्ती हाउसिंग को बढ़ावा
सरकार केवल अटके प्रोजेक्ट्स ही नहीं, बल्कि सस्ती आवास योजनाओं पर भी जोर दे रही है. मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी National Capital Territory of Delhi के आसपास करीब 700 से 750 झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास की योजना बनाई जा रही है. इस संबंध में उच्च स्तर पर नीति ढांचा तैयार किया जा रहा है. यदि यह योजना लागू होती है तो एनसीआर क्षेत्र में अफोर्डेबल हाउसिंग को बड़ी गति मिल सकती है और हजारों परिवारों को बेहतर आवास मिल सकेगा.
जमीन और वित्त की चुनौती पर सरकार का फोकस
रियल एस्टेट सेक्टर में जमीन की उपलब्धता और फंडिंग बड़ी चुनौतियां मानी जाती हैं. मंत्री ने सुझाव दिया कि क्रॉस-सब्सिडी मॉडल के जरिए जमीन की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है, बशर्ते सभी पक्षों के बीच सहमति बने. साथ ही, CSR फंड के माध्यम से भी गरीब वर्ग के लिए संसाधन जुटाने की संभावना जताई गई. बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों की सीमित सक्रियता को देखते हुए वैकल्पिक वित्त स्रोतों पर विचार किया जा रहा है.
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में हाउसिंग सेक्टर की बड़ी भूमिका
कॉन्क्लेव के दौरान निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनना है तो हाउसिंग सेक्टर का योगदान 2047 तक GDP का 15 प्रतिशत होना चाहिए. उन्होंने किराये के मकानों को बढ़ावा देने और बड़े पैमाने पर रेंटल हाउसिंग मॉडल को अपनाने की भी बात कही. कार्यक्रम में प्रवीण जैन और मंत्री खट्टर ने एक संयुक्त नॉलेज रिपोर्ट भी जारी की, जिसमें रियल एस्टेट सेक्टर के लिए विस्तृत रोडमैप पेश किया गया.सरकार की इस पहल से उन लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने अपने सपनों का घर पाने के लिए वर्षों पहले निवेश किया था. यदि समर्पित फंड और नई नीतियां जल्द लागू होती हैं, तो अधूरे प्रोजेक्ट्स में दोबारा जान आ सकती है और हाउसिंग सेक्टर को नई रफ्तार मिल सकती है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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