मध्य पूर्व में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है. आमतौर पर ऐसे हालात में सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार तस्वीर अलग दिख रही है. युद्ध और अनिश्चितता के बावजूद सोना और चांदी दोनों में गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है.
ईरान जंग के बावजूद सोने के दाम में गिरावट. (Image:AI)
निवेशकों की ‘कैश बचाओ’ रणनीति
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा हालात में निवेशकों का प्राथमिक लक्ष्य जोखिम कम करना और नकदी सुरक्षित रखना बन गया है. जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है, तब कई निवेशक अपने निवेश पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए अलग-अलग एसेट बेचकर नकदी जुटाते हैं. इस प्रक्रिया में कभी-कभी सोने जैसे सुरक्षित निवेश भी बिकवाली के दबाव में आ जाते हैं. खासकर वे निवेशक जिनके पास लीवरेज या उधार लेकर निवेश किया गया होता है, उन्हें मार्जिन कॉल पूरा करने के लिए भी सोना बेचने की जरूरत पड़ सकती है. इसी वजह से युद्ध जैसे माहौल में भी सोने की कीमतों में अस्थायी गिरावट देखने को मिल रही है.
मजबूत डॉलर ने बढ़ाया दबाव
सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी बड़ा असर डाल रही है. वैश्विक संकट के समय अक्सर निवेशक सुरक्षित मुद्रा के रूप में डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की ओर रुख करते हैं. इससे डॉलर मजबूत हो जाता है और अन्य मुद्राओं के मुकाबले उसकी मांग बढ़ जाती है. चूंकि सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर सोना अन्य देशों के खरीदारों के लिए महंगा हो जाता है. इससे मांग पर असर पड़ता है और कीमतों में दबाव दिखाई देता है. हाल ही में भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया, जो डॉलर की बढ़ती ताकत का संकेत है.
तेल की कीमत और ब्याज दर की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार बाजार की स्थिति पहले से थोड़ी अलग है. कच्चे तेल की तेजी से बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. अगर तेल महंगा रहता है तो वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ सकती है और इससे केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों पर फिर से सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है. जब ब्याज दरों के बढ़ने की संभावना बढ़ती है, तब डॉलर को समर्थन मिलता है और सोने पर दबाव बढ़ता है. इसी वजह से फिलहाल सोना युद्ध से मिलने वाले पारंपरिक समर्थन का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है.
मुनाफावसूली भी गिरावट की वजह
सोने में हालिया गिरावट की एक बड़ी वजह मुनाफावसूली भी मानी जा रही है. पिछले एक साल में सोने की कीमतों में काफी तेजी आई थी और कई निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिला था. बाजार में अनिश्चितता बढ़ने के बाद कुछ निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए सोना बेचना शुरू कर दिया. इस वजह से कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट लंबे समय के रुझान में बदलाव का संकेत नहीं है, बल्कि यह केवल अल्पकालिक समायोजन हो सकता है.
लंबी अवधि में फिर चमक सकता है सोना
बाजार जानकारों का मानना है कि दीर्घकाल में सोने और चांदी की मांग मजबूत बनी रह सकती है. दुनिया भर में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सीमित आपूर्ति और केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीद सोने को समर्थन देती है. पिछले दशक में कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविध बनाने के लिए सोने की खरीद बढ़ाई है. इसी तरह चांदी की मांग भी औद्योगिक उपयोग से जुड़ी हुई है, इसलिए लंबी अवधि में इसमें भी संभावनाएं बनी रह सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों के लिए चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है, ताकि बाजार की अस्थिरता से जोखिम कम किया जा सके.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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