रिलायंस चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा है कि आज एआई के क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती कम्प्यूट की कमी और उसकी ऊंची लागत है. जियो इंटेलिजेंस भारत के लिए स्वदेशी कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करेगा.
रिलायंस चेयरमैन ने कहा कि आज एआई के क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती कम्प्यूट की कमी और उसकी ऊंची लागत है.
रिलायंस चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि हम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टेक कंपनियों के साथ साझेदारी करेंगे, लेकिन केवल तकनीक के आयातक के रूप में नहीं, बल्कि अगली सदी के को-आर्किटेक्ट के रूप में. हम यह साबित करेंगे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नौकरियां नहीं छीनता, बल्कि उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर पैदा करता है. उन्होंने कहा कि वे एंटरप्राइजेज, स्टार्ट-अप्स और शैक्षणिक संस्थानों के साथ गहरी साझेदारी का एक सशक्त इकोसिस्टम बनाएंगे.
बताई एआई की चुनौतियां
रिलायंस चेयरमैन ने कहा कि आज एआई के क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती कम्प्यूट की कमी और उसकी ऊंची लागत है. जियो इंटेलिजेंस भारत के लिए स्वदेशी कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करेगा. इसके लिए हमने मल्टी-गीगावॉट स्तर की कंप्यूट क्षमता के निर्माण की शुरुआत कर दी है. इस वर्ष 120 मेगावॉट क्षमता ऑनलाइन आ जाएगी.
उन्होंने कहा कि जियो ने भारत को इंटरनेट युग से जोड़ा था, अब वह देश को इंटेलिजेंस युग से जोड़ेगा. हम इंटेलिजेंस को किराए पर लेने का जोखिम नहीं उठा सकते. हम इंटेलिजेंस की लागत को उसी तरह नाटकीय रूप से कम करेंगे, जैसे डेटा की लागत कम की गई थी.
(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)
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