सर रतन टाटा ट्रस्ट में नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा की नियुक्ति अधर में लटक गई है. ऐसा टाटा ट्रस्ट की शनिवार को होने वाली बैठक के रद्द होने की वजह से हुआ है. सर रतन टाटा ट्रस्ट की बैठक टलने के पीछे सबसे बड़ा कारण ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और नियमों को माना जा रहा है. दरअसल, टाटा ट्रस्ट्स में किसी भी नए ट्रस्टी की नियुक्ति के लिए बोर्ड के सभी सदस्यों की सर्वसम्मत मंजूरी अनिवार्य होती है.
सर रतन टाटा ट्रस्ट की बैठक टलने के पीछे सबसे बड़ा कारण ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और नियमों को माना जा रहा है. दरअसल, टाटा ट्रस्ट्स में किसी भी नए ट्रस्टी की नियुक्ति के लिए बोर्ड के सभी सदस्यों की सर्वसम्मत मंजूरी अनिवार्य होती है. सूत्रों का मानना है कि नेविल टाटा की नियुक्ति पर सभी ट्रस्टियों को एक मत पर लाने और आपसी चर्चा के लिए और अधिक समय देने के उद्देश्य से ही इस बैठक को आगे टाला गया है. फिलहाल, SRTT की अगली बैठक के लिए कोई नई तारीख नहीं रखी गई है, जिससे यह नियुक्ति प्रक्रिया फिलहाल ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है.
SDTT में शामिल हुए नेविल लेकिन SRTT में अटकी बात
शनिवार को जहां SRTT की बैठक रद्द रही, वहीं टाटा समूह के दूसरे बड़े ट्रस्ट, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) की बैठकें तय कार्यक्रम के अनुसार हुईं. नेविल टाटा ने शनिवार को एसडीटीटी की बैठक में हिस्सा लिया. नवंबर 2025 में एसडीटीटी ने नेविल टाटा और टाइटन के पूर्व एमडी भास्कर भट्ट की नियुक्ति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन सर रतन टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में अभी भी इन नामों को स्वीकृति मिलना बाकी है. चूंकि SDTT और SRTT मिलकर ही टाटा समूह पर नियंत्रण रखते हैं, इसलिए दोनों ट्रस्टों में समान स्वीकृति होना आवश्यक है. वर्तमान में नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन, विजय सिंह और डेरियस खंबाटा जैसे दिग्गज दोनों प्रमुख ट्रस्टों (SDTT और SRTT) में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
एजेंडा विवाद और वेणु श्रीनिवासन की आपत्ति
नेविल टाटा की नियुक्ति का मुद्दा पिछले कुछ महीनों से चर्चा में है. 11 नवंबर 2025 को हुई बैठकों के दौरान एक तकनीकी पेंच फंस गया था. उस समय SDTT की बैठक में नेविल और भास्कर भट्ट के नाम प्रस्तावित किए गए थे और वहां उन्हें मंजूरी मिल गई थी. लेकिन जब उसी दिन एसआरटीटी की बैठक हुई तो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने इन प्रस्तावों पर आपत्ति जताई थी. उनका तर्क था कि ये नाम औपचारिक बोर्ड एजेंडा में शामिल नहीं थे और इन्हें “अन्य विषयों” के तहत अचानक नहीं उठाया जाना चाहिए. श्रीनिवासन के सुझाव के बाद ही इस विषय को अगली बैठक के लिए टाल दिया गया था.
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